आखिर ग्राम पंचायत रातिकरार में सरपंच सुनीता और भरत के बीच पर्दे के पीछे कौन सी खिचड़ी पक रही थी?
क्या सचिव और GRS भी थे हिस्सेदार? आखिर खिचड़ी में घी गया कहां?
ग्राम पंचायत रातिकरार की गलियों में एक ही सवाल गर्म है— आखिर सरपंच सुनीता और भरत के बीच कौन सी खिचड़ी पक रही थी, और वह भी इतनी चुपके-चुपके?
पंचायत के अंदरूनी कामकाज अक्सर जनता से दूर, बंद कमरों में होता है, मगर इस बार हवा कुछ और कह रही है। जो खबरें सामने आ रही हैं, वे बताती हैं कि यह खिचड़ी इतनी साधारण नहीं थी…
दावे सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं हैं! Stringer24News को मिले दस्तावेज़ और रिकॉर्ड बताते हैं कि दाल में काला ही नहीं… यहां तो पूरी दाल काली पकाई गई थी!
बजट के वितरण से लेकर निर्माण कार्यों की फाइलों तक, कई बिंदुओं पर ऐसे तथ्य मिले हैं जो यह संकेत देते हैं कि रातिकार पंचायत में “गबन की खिचड़ी” लंबे समय से धीमी आंच पर पकती रही।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल…
इस खिचड़ी में घी कौन डाल रहा था — और घी आखिर गया कहां? अब इसकी गंध दूर-दूर तक पहुंचने लगी है। गांव के लोग भी अब पूछने लगे हैं कि “काम तो कागज में पूरा दिखता है, गांव में नज़र क्यों नहीं आता?”
जल्द ही यह भी सामने आएगा कि असली मास्टरमाइंड कौन था — खिचड़ी पकाने वाले हाथ कितने थे, और घी किसने पी लिया।
