ग्राम पंचायत खमरिया में गरीबों की परीक्षा
आवास प्लस की आख़िरी किस्त के लिए दर-दर भटक रहे ग्रामीण
जनपद पंचायत साईखेड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत खमरिया में प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना गरीबों के लिए वरदान नहीं, बल्कि संघर्ष और अपमान की कहानी बनती जा रही है।
आवास प्लस की आख़िरी किस्त पाने के लिए ग्रामीण महीनों से पंचायत के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न तो किस्त मिल रही है और न ही मनरेगा की हाज़री का मेहनताना।
“गरीब मज़दूर सुबह से शाम तक काम करता है, लेकिन उसकी हाज़री महीनों तक सिस्टम में दर्ज नहीं होती।”
ग्रामीणों का आरोप है कि GRS के पास हाज़री डालने तक का समय नहीं, और हालात ऐसे हैं कि एक-एक किस्त के लिए 6-6 महीने तक इंतज़ार करना पड़ता है।
❓ तीखे सवाल जो सिस्टम से जवाब मांगते हैं
- क्या गरीबों को अपना हक़ मांगना गुनाह हो गया है?
- आवास प्लस और मनरेगा जैसी योजनाएं ज़मीन पर क्यों दम तोड़ रही हैं?
- हाज़री और भुगतान में देरी के लिए कौन ज़िम्मेदार है?
- जनपद और पंचायत के अधिकारी कब जवाब देंगे?
ग्राम पंचायत खमरिया की यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों के साथ खुला अन्याय है। अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह आक्रोश किसी बड़े आंदोलन में बदल सकता है।
