मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कामरेड जगदीश पटेल ने कहा कि आदिवासी नेता को झूठे मामले में फँसाने की साजिश ने भाजपा का आदिवासी-विरोधी रवैया फिर उजागर कर दिया है। लगातार आदिवासियों के अधिकारों और वन विभाग की ज्यादतियों के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लालता प्रसाद कोल और उनके परिवार पर फर्जी मामले थोपे जा रहे हैं।
माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि रीवा जिले के अतरेला वन क्षेत्र के अंतर्गत आदिवासी नेता के परिवार को “जंगली सूअर के मात्र 300 ग्राम मांस” के आधार पर फँसाना सरासर अन्याय है। उन्होंने तीखा सवाल उठाया —
“यदि 2 क्विंटल सूअर बरामद बताया गया, तो बाकी मांस, हड्डियाँ और खाल कहाँ हैं?”
माकपा नेताओं का आरोप है कि इस साजिश में वन विभाग और ग्राम के भाजपा समर्थित सरपंच सुरेंद्र सिंह की भूमिका भी संदिग्ध है। किसी भी पक्ष के पास इस बड़े अंतर का जवाब नहीं है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में जजों की भर्ती में भी भाजपा सरकार का आदिवासी विरोधी चेहरा सामने आया है, जहाँ आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 121 पदों में एक भी नियुक्ति नहीं की गई।
माकपा ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन झूठे मुकदमे वापस नहीं लेता और निष्पक्ष जांच नहीं करता, तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
सचिव, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (नरसिंहपुर)
मो.: 9827986787
