घाट पर जाकर फोटो खिंचवाते हुए निर्देश देना बहुत आसान है!थोड़ा पैरों को कष्ट दें और घाट के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को नजदीक से जाकर देखेंगे तो आपको अधिकारियों और नेताओं के इस सफाई फोटो सेशन की सच्चाई अच्छी तरह से समझ में आ जाएगी!
धार्मिक कही जाने वाली बरमान बस्ती को कूड़े का ढेर बनाकर रख दिया है।बस स्टैंड पर उतरते ही खाली शराब की बोतलें और जगह जगह कूड़े के ढेर हैं!
जब यह दृश्य देख रहा था,तब मन में सवाल आया कि, गंदगी तो यहां फली हुई है फिर ये नेता और अधिकारी झाड़ू लेकर फोटो खींचवाने सीढ़ी या रेत घाट ही क्यों जाते हैं?बस्ती या तट के दूसरे हिस्सों में क्यों नहीं?
मैने देखा कि जगह जगह सार्वजनिक शौचालय तो बनवाए हैं लेकिन पंचायत नियमित साफ सफाई से बचने के लिए इन सभी शौचालय,सुलभ कॉम्लेक्स पर ताला डाल कर बैठी है जैसे धन पर फन फैलाए कुंडली मारे बैठा काला सांप!
जहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं,लेकिन उन्हें नित्यकर्म या नेचर कॉल की स्थित में घाट पर ही फ्रेश होना पड़ता है!इस शर्मनाक तस्वीर को तो आपने भी नर्मदा घाट पर कभी न कभी देखा या महसूस किया होगा!अब इसे पंचायत की कामचोरी नहीं तो और क्या कहेंगे?
नर्मदा को अपवित्र करने में पंचायत भी महती भूमिका निभा रही है और आज नहीं तो कल पंचायत को इसके दुष्परिणाम भोगने भी पड़ेंगे!अपने ही किए हुए कर्मों से बचने का कोई उपाय नहीं है!
आज भी बस्ती के दूषित पानी को नर्मदा में जाने से रोकने के कोई ठोस प्रभावी उपाय दिखाई नहीं देते! घाट पर मल और गंदगी युक्त जो अपशिष्ट नर्मदा में मिल रहा है,भक्तजन उससे आचमन कर रहे हैं!
जिला कलेक्टर के आदेश भी महज कागजी ही दिखाई देते हैं?जहां घाटों के मुख्य हिस्सों को फिर एक बार साफ कर दिया जाएगा!सोशल मीडिया पर तस्वीरें अपलोड कर दी जाएंगी!भैया जी फिर आयेंगे झाड़ू लेकर, ,फोटो खींचाएंगे और पब्लिसिटी बटोरकर चले जाएंगे!
घाट पर एक बार फिर बाकी रह जाएगी गंदगी और उस गंदगी के बीच पूजन अर्चन कर अच्छे दिनों के आने की कामना करती हुई जनता!आंख बंद करके पूजन करती हुई वो जनता जो यह पूछने का साहस भी नहीं करती कि हमें आचमन के लिए ये गंदगी क्यों परोस रहे हो?नर्मदा के जल को दूषित होने से बचाने के लिए क्या कर रहे हो?
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