मध्य प्रदेश की मंडियों में इस समय प्याज किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर रहा है। रतलाम मंडी में प्याज का भाव जहां कभी ₹30 से ₹40 प्रति किलो तक रहा करता था, वहीं अब यह ₹2 से ₹8 प्रति किलो तक पहुंच गया है।
“इतनी मेहनत, सिंचाई और मजदूरी के बाद अगर हमें दो रुपये किलो मिल रहे हैं तो इससे अच्छा तो खेत में सड़ा देना ही बेहतर लगता है,” – रतलाम के एक किसान ने आंखों में आंसू भरते हुए कहा।
रिपोर्टों के अनुसार, रतलाम सहित नीमच और मंदसौर की मंडियों में प्याज की बंपर आवक के कारण भाव धराशायी हो गए हैं। कई जगह किसानों को अपने उत्पादन का उचित मूल्य न मिलने से वे प्याज ट्रक भरकर मंडी में फेंक रहे हैं या नुकसान के डर से बेच ही नहीं रहे हैं!
मंडी आंकड़ों के अनुसार, रतलाम में प्याज का औसत भाव ₹800 प्रति क्विंटल (लगभग ₹8 प्रति किलो) के आसपास है, जबकि कुछ रिपोर्टों में ₹2 प्रति किलो तक के भाव का दावा किया गया है। हालांकि यह कीमत सामान्य गुणवत्ता से कम प्याज या अधिक आवक वाले दिन की स्थिति दर्शाती है।
किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत, डीज़ल और खाद के दामों के बावजूद जब फसल का भाव लागत से भी नीचे चला जाता है, तो खेती घाटे का सौदा बन जाती है। सरकार से मांग की जा रही है कि प्याज के लिए समर्थन मूल्य तय किया जाए और नुकसान झेल रहे किसानों को राहत दी जाए।
“सरकार अगर सच में किसानों की हमदर्द है तो प्याज की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तुरंत शुरू करे,” – किसान संगठनों की अपील।
फिलहाल, प्याज किसानों की आंखों में लालपन केवल मेहनत का नहीं बल्कि बाजार की बेरुखी का भी प्रतीक बन चुका है। जब खेतों की लाली बाजार में खून के आँसू बन जाए, तो यह केवल एक फसल का नहीं बल्कि किसानों के आत्मविश्वास का भी पतन है।
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