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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर शराबखोरी पर रोक लगाने में रेलवे पुलिस नाकाम?

नरसिंहपुर से बड़ी लापरवाही की खबर

नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर-2 एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्टेशन से सटी झुग्गियों में निवासरत कुचबंदिया समुदाय के कुछ परिवार यहां बड़े पैमाने पर अवैध कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री कर रहे हैं—और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब रेलवे पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है।

“सिर्फ 10 रुपये में प्लेटफॉर्म पर ही मिल जाता है एक गिलास शराब… कैमरे लगे हैं, पर कार्रवाई शून्य!”

यात्रियों से मिली जानकारी के अनुसार, शराब खरीदना यहां उतना ही आसान है जितना पानी लेना। पेयजल के नल के पास जाकर बस पीछे की झुग्गी में आवाज देना भर है—और कुछ ही सेकंड में महिला या पुरुष प्लेटफॉर्म पर ही शराब थमा देते हैं। यात्री चाहें तो पूरी बोतल भी भरवा सकते हैं—यहां न कोई रोक-टोक, न कोई डर

स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे तो जरूर लगे हैं, लेकिन उनका उपयोग किस लिए हो रहा है, यह किसी की समझ में नहीं आता। कई बार कुचबंदिया समुदाय के नशे में धुत पुरुष और महिलाएं प्लेटफॉर्म पर उत्पात करते दिखते हैंमहिलाओं के साथ छेड़खानी, डराना-धमकाना और गाली-गलौज की घटनाएं यात्रियों को असुरक्षित कर रही हैं।

रेलवे पुलिस की चुप्पी—सबसे बड़ा सवाल

यही नहीं, प्लेटफॉर्म से जुड़ी झुग्गियों की कई महिलाएं ट्रेनों में अवैध वेंडरिंग करती दिखती हैं—लेकिन रेलवे पुलिस की नजरों से जाने कैसे बच जाती हैं। यह खुली लापरवाही न केवल यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है, बल्कि स्टेशन को अपराधियों का सुरक्षित अड्डा बनाने का रास्ता खोल रही है।

“क्या रेलवे पुलिस की ड्यूटी केवल वर्दी पहनकर घूमने तक सीमित हो चुकी है?”

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिकायतें कई बार की गईं, लेकिन स्थिति जस की तस है। सवाल साफ है—क्या रेलवे पुलिस वाकई कार्रवाई नहीं कर पा रही, या कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति ही खत्म हो गई है?

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