दीपावली सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि यह पूरे पांच दिनों तक चलने वाला ऐसा उत्सव है जो हमारे जीवन में उजाला, आशा और समृद्धि लेकर आता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक दीपक की लौ उसे चीरकर प्रकाश फैला सकती है।
हर साल की तरह 2025 में भी दीपावली का उत्सव अक्टूबर माह में उमंग और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। धनतेरस से भाई दूज तक, हर दिन का अपना विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है। आइए जानें — इस बार दीपावली के पांचों पर्व किस दिन और किन मुहूर्तों में मनाए जाएंगे।
| पर्व | तिथि | शुभ मुहूर्त |
|---|---|---|
| धनतेरस | 18 अक्टूबर, शनिवार | सायं 5:48 से रात्रि 8:19 बजे तक |
| नरक चतुर्दशी | 19 अक्टूबर, रविवार | रात्रि 11:41 से 12:31 बजे तक |
| दीपावली (लक्ष्मी पूजन) | 20 अक्टूबर, सोमवार | शाम 06:51 से 08:48 बजे तक |
| गोवर्धन पूजा | 22 अक्टूबर, बुधवार | सुबह 6:26–8:42, दोपहर 3:29–5:44 |
| भाई दूज | 23 अक्टूबर, गुरुवार | दोपहर 1:13 से 3:28 बजे तक |
💰 धनतेरस — संपन्नता का शुभ आरंभ
दीपावली का प्रारंभ धनतेरस से होता है। इस दिन देवी लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विधान है। नए बर्तन, सोना-चांदी या धन संबंधित वस्तुएं खरीदना इस दिन शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन दीप जलाने से वर्षभर घर में लक्ष्मी का आगमन होता है।
🌑 नरक चतुर्दशी — नकारात्मकता पर विजय
दीपावली से एक दिन पूर्व मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली हमें भीतर और बाहर के अंधकार से मुक्त होने की प्रेरणा देती है। इस दिन स्नान, तेल अभ्यंग और दीपदान का विशेष महत्व है।
🪔 दीपावली — प्रकाश, समृद्धि और आराधना का दिन
कार्तिक अमावस्या की रात जब चारों ओर दीपों की रौशनी फैलती है, तब पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। लक्ष्मी-गणेश की पूजा, दीपदान और घर की सजावट इस दिन के प्रमुख आकर्षण हैं। इस वर्ष पूजन मुहूर्त शाम 6:51 से 8:48 बजे तक रहेगा।
⛰️ गोवर्धन पूजा — कृतज्ञता का पर्व
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का आयोजन होता है। इस दिन लोग गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं। यह दिन प्रकृति और अन्न के प्रति आभार व्यक्त करने का है।
👫 भाई दूज — स्नेह और सुरक्षा का वचन
दीपोत्सव का समापन भाई दूज से होता है, जब बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनके सुख और दीर्घायु की कामना करती हैं। यह पर्व प्रेम, विश्वास और परिवार के बंधन को मजबूत बनाता है।
संपादकीय टिप्पणी: यह लेख Stringer24 News की संपादकीय टीम द्वारा तैयार किया गया है। हमारा उद्देश्य केवल परंपरागत नहीं, बल्कि आधुनिक दृष्टि से भी त्योहारों के महत्व को साझा करना है।

