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क्या जनता की कमाई नाश्ते में उड़ाई जा रही है?
📅 प्रकाशित : 15 अक्टूबर 2025 | स्रोत : Stringer24 News ब्यूरो, नरसिंहपुर

(नरसिंहपुर) — मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में लोगों को लेकर जाने के नाम पर जो रंगीन-ढोल-रीत देखने मिली, उसका असली हिसाब जब बैंक बही में आएगा तो आम जनता के लिए चौंकाने वाला होगा। सवाल साफ है: क्या गाँव की मुश्त कमाई और सरकारी योजनाओं के पैसों का खर्च़ चाय-नाश्ते और शो-ऑफ पर किया जाना सही है? हम सीधे-सीधे आंकड़े लेकर आए हैं — कच्चे, सुलझे और पुख्ता।

घटनाक्रम का सार

एक ग्राम पंचायत ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान चाय-नाश्ते पर करीब ₹5,000 खर्च किए। यह एक पंचायत का आंकड़ा है — और नरसिंहपुर ज़िले में लगभग 450 ग्राम पंचायतें हैं। अब समझिए, यही एक छोटा-सा खर्च जिलेभर में कितना भारी पड़ता है।

पुख्ता गणना (स्टेप-वाइज)

  • एक पंचायत: ₹5,000
  • ग्राम पंचायतों की संख्या: 450
गणना:
5,000 × 450 = 2,250,000  

₹2,250,000 = ₹22,50,000 (22.5 लाख रुपये) = 0.225 करोड़ रुपये

सालाना अनुमान

अगर साल में 3 बार ऐसा खर्च हुआ: ₹22.5 लाख × 3 = ₹67.5 लाख (0.675 करोड़)
अगर साल में 4 बार ऐसा हुआ: ₹22.5 लाख × 4 = ₹90 लाख (0.9 करोड़)

फर्क जो जनता को चोट पहुँचा रहा है

ये केवल चाय-नाश्ते के सीधे खर्च हैं — यहां कर्मचारी समय, परिवहन, आयोजन स्थल साज-सज्जा, और अन्य अनौपचारिक खर्च शामिल नहीं हैं। जब पंचायतों को विकास, स्वास्थ्य या शिक्षा के कामों के लिए सीमित राशि मिलती है, तो ऐसे दिखावे पर पैसे उड़ाना सीधे तौर पर समाज के जरूरतमंदों के हिस्से से कटौती है।

सवाल — जवाब की जरूरत

  • क्या ये खर्च पंचायत के खजाने से नियम अनुसार किए गए?
  • क्या जनता को पहले से बताया गया कि उनका पैसा कार्यक्रम-खर्च पर जाएगा?
  • क्या खर्च पर पारदर्शिता और रसीदें मौजूद हैं?
  • क्या ऐसे आयोजन जरूरी हैं या यह केवल राजनीतिक प्रदर्शन है?

हमारा निष्कर्ष

₹22.5 लाख रुपये—यह वह रकम है जो सिर्फ चाय-नाश्ते पर नरसिंहपुर के 450 ग्राम पंचायतों की तरफ़ से एक बार के आयोजन में लग सकती है। अगर साल में 3–4 बार यह सिलसिला चलता है तो यह ₹67.5 लाख से ₹90 लाख रुपये तक जा सकता है। ये आंकड़े खुद बोलते हैं — यह जनता की कमाई है, जो या तो विकास पर खर्च होनी चाहिए थी या बुनियादी सुविधाओं पर। क्या यही वादा था — अच्छे दिन या सिर्फ दावतों का दौर? जनता को जवाब चाहिए, पारदर्शिता चाहिए और खर्च का ठीक लेखा-जोखा चाहिए।

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