जीआरएस और सचिव को व्यापक भ्रष्टाचार के लिए सरकारी अवार्ड से सम्मानित किया जाना चाहिए?तमाम तरह के शातिर हथकंडे आजमाकर इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करना बताता है की ये लोग इस खेल के मंझे हुए खिलाड़ी हैं?
साजिश और गबन के इस घिनौने खेल ने ना सिर्फ भ्रष्टाचारियों के चेहरे से नकाब हटा दिया है, बल्कि अधिकारियों की मिलीभगत के खेल पर से भी पर्दा हटा दिया है।
फर्जी मजदूर और फर्जी मजदूरी के खेल में चांदी के सिक्कों के लालची इंसानियत भूलकर हैवान बन बैठे?हैरानी की बात तो यह है की यह सब जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे चलता रहा और अधिकारी इस बात से पूर्णतः अनजान रहे?क्या यह संभव है?
ग्राम पंचायत रमपुरा में "अंधेर नगरी और चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा" की तर्ज पर काम चल रहा है।बिना साफ सफाई किए ही जादुई तरीके से कागजों में स्वच्छता दर्शाई जा रही है!ग्रामीण समझ नही पा रहे हैं की, आखिर यह सब क्या चल रहा है?सवाल यह भी है की क्या अधिकारी इस राशि की भरपाई करेंगे या फिर रेवड़ियां यूं ही बांट दी जाएगी।
गुप्त सूत्रों के हवाले से आई खबर पर विश्वास करें तो जीआरएस और सचिव द्वारा शासकीय दस्तावेजों में हेर फेर कर गबन के इस खेल पर पर्दा डालने की साजिश रची जा रही है!हालाकी इस तरह की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज भी नही किया जा सकता है।
इस बारे में जब हमने संबंधित विभागों के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की तब वही रटा रटाया सरकारी बयान की शीघ्र ही जांच की जाएगी और उचित कार्यवाही की जायेगी ,किंतु स्थिति पर गौर करें तो नतीजा सिफर ही नजर आता है।
ऐसा नही की इतने से ही जीआरएस और सचिव की भूख शांत हो गई हो, मनरेगा के नाम पर भी जेब और तिजोरियां भरने की कोशिश की गई!कागजी विकास के आंकड़ों पर जमकर रबड़ी डकारी गई।
कागजी निर्माण/साफ सफाई में कागजी विकास की जमीनी हकीकत आपको सोचने पर मजबूर कर देगी की कैसे कोई चंद सिक्कों के लालच में नैतिकता की हदों से गिर जाता है?अपनी पैसों को भूख मिटाने के लिए न सिर्फ गांव के विकास को हड़प लिया बल्कि भोले भाले ग्रामीणों के साथ भी विश्वासघात किया।
जारी :
इस व्यापक गोलमाल पर विस्तृत विश्लेषण जारी है,जिसके परिणामों से शीघ्र ही आम जनता को अवगत कराया जाएगा।
