*यह सच है कि लोग दिल से मदद करते हैं!*
जिले में तकरीबन 450 ग्राम पंचायत और लगभग 1100 गांव हैं!विगत दिनों जिले में हत्याकांड और स्कैम जैसी बड़ी घटनाएं घटित हुईं!
इस दौरान (जिला चिकित्सालय, रेवा नगर, आपात दुर्घटनाएं इत्यादि) घटनाओं से संबंधित अनेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे, किन्तु हम इस दौरान वीडियो नहीं बना सके और ना ही तत्काल कोई कवरेज कर सके!दरअसल हमारा नेटवर्क और संसाधन सीमित है!हम चाहकर भी सेटेलाइट चैनलों की तरह तत्काल कवरेज नहीं कर पाते हैं।
इसलिए किसी भी समाचार या स्टोरी की तलाश में सुबह सात बजे घर से निकलना पड़ता है। यह मेरा डेली रूटीन है।नरसिंहपुर से पिपरिया और नरसिंहपुर से जबलपुर तक अप डाउन करने के लिए रेलवे mst पास बनवा रखा है। जिला एवं तहसील मुख्यालयों के साथ ही आंतरिक ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों तक भी जाना होता है! इस दौरान अक्सर देर रात घर पहुंचता हूं और कई बार तो आंतरिक ग्रामीण अंचल में आवागमन की सुविधा न होने पर रात गांव में ही स्टे करना पड़ता है।
दरअसल खबरों के नाम पर महज सरकारी या गैर सरकारी विज्ञप्तियां अपने पाठकों को परोसना हमारा लक्ष्य नहीं है और ना ही हम एक ही खबर की कॉपी पेस्ट वाली निरर्थक सूचनाओं का अंबार पाठकों को खबर के तौर पर दिखाना चाहते हैं!
मुझे एक दिन में तीन से चार गांवों का विजिट करना पड़ता है और दिनभर का यह सफर तकरीबन चालीस किलोमीटर से अस्सी किलोमीटर का होता है!सुबह नाश्ते की आदत नहीं है,इसलिए अक्सर तो घर से सिर्फ चाय पीकर ही विजिट पर निकलता हूं!अक्सर यह यात्राएं बेहद थका देने वाली होती है!
दिनभर की थकान के बाद घर आकर फिर लैपटॉप या टैब के सामने बैठकर एडिटिंग और राइटिंग कंप्लीट कर समाचार, सूचनाओं,विज्ञापन का प्रकाशन और प्रसारण किया जाता है!
हालांकि पाठकों को अक्सर शिकायत रहती है कि हम फलां जगह का कवरेज नहीं कर पाए!दरअसल वे चाहते हैं कि हम ग्रामीण हालात पर बात करें और ग्रामीण अंचल की खबरों और सूचनाओं को प्राथमिकता दें।क्यों कि ग्रामीण अंचल के मुद्दों को आज भी अनदेखा किया जाता है!
इसके लिए सामाजिक संगठनो और समाजसेवियों द्वारा हमें डोनेशन उपलब्ध भी करवाया जाता है। स्टोरी कवरेज के लिए यात्रा व्यय की व्यवस्था की जाती है और यह संभव हो पाता है सामुदायिक सहयोग की बदौलत।
हालांकि आपात स्थिति में हमें डोनेशन कलेक्शन की अपील करते हैं ताकि विज्ञापन के दबाव से मुक्त रह सकें और लोग सहायता पहुंचाते हैं!यह सच है कि लोग दिल से मदद करते हैं!यही वजह है कि stringer24news ने पत्रकारिता की यात्रा के सफलतापूर्वक पांच वर्ष पूरे किए!
हालांकि यह फंड/डोनेशन पर्याप्त नहीं है!क्यों कि एक मीडिया संस्थान को चलाने के लिए तमाम तरह के इक्यूपमेंट और सॉफ्टवेयर से लेकर सूचनाओं के एकत्रीकरण, प्रकाशन, वितरण,सहयोगी/कर्मचारियों के मासिक भुगतान और वेबसाईट का मासिक रखरखाव के लिए धन की आवश्यकता होती है! क्यों कि जिस निष्पक्षता और पारदर्शिता की जनता अपेक्षा करती है,वह विज्ञापन के दबाव में संभव नहीं है!
जारी :

