*सरपंच पति और सचिव की करतूत, फर्जी बिलों का भुगतान कर शासन के खजाने में लगा रहे सेंध?: ग्राम पंचायत मालनवाड़ा नारगी :चिचली :नरसिंहपुर*
बिल खुद ब खुद फर्जीवाड़ा की कहानी को बयां कर रहे हैं!:stringer24news के हाथ लगे पंचायतों के बिल ने सबको चौका दिया!
वित्तीय मामलों में पारदर्शिता के लिए शासन स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों और बिचौलियों की मिलीभगत के सामने सभी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
ग्राम पंचायत सचिव सरपंच और जीआरएस से मिलकर सामग्री के नाम पर फर्जी तरीके से हजारों रुपए की राशि निकालकर हजम कर रहे हैं। पोर्टल पर फीड किए गए बिल खुद ब खुद फर्जीवाड़ा की कहानी को बयां कर रहे हैं।
ऐसा ही मामला जनपद पंचायत चिचली की ग्राम पंचायत मालनवाड़ा नारगी का प्रकाश में आया है। यहां स्टेशनरी, मटेरियल, फोटो कॉपी, प्रिंट के साथ ही मटेरियल खरीदी के नाम पर कीमत से ज्यादा के बिल बाउचर लगाकर शासकीय राशि खुर्द-बुर्द की जा रही है!
stringer24news के हाथ लगे पंचायतों के बिल ने सबको चौका दिया है।जिस बड़ी संख्या में चिचली जनपद अंतर्गत पंचायतों में स्टेशनरी एवं जनरल स्टोर्स के नाम पर बिल लगाकर सामग्री क्रय की गई है ऐसा लगता है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया है और कमिशनबाजी के चलते एक ही दुकान से सामग्री खरीदी की गई है।
सरकारी राशि का किस तरह बंदरबांट किया जाता है इसकी बानगी ग्राम पंचायत मालनवाड़ा में देखने मिली है। यहां सरपंच पति व सचिव निर्धारित कीमत से दोगने कीमत में बिलों का भुगतान कर अपने चहेते सप्लायरों को आर्थिक लाभ पहुंचा रहे हैं!शासकीय पोर्टल पंचायत दर्पण में लगे बिल बाउचरों को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह जिम्मेदार शासकीय राशि का बंदरबांट कर रहे हैं!
ग्राम पंचायत में आज भी मूलभूत समस्या बनी हुई है। जिसके समाधान करने के बजाए सरकारी धन का खुला दुरुपयोग सरपंच के द्वारा किया जा रहा है। जिस पर कोई भी अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। ग्राम पंचायत के सरपंच के द्वारा पंचायती राज अधिनियम को किनारे करते हुए अपने नियम पंचायत में चला रहे हैं।
पंचायत में व्यय करने के लिए जो राशि आती है वो राशि पंचायत पदाधिकारियों के लिए चारागाह साबित हो रही है। पंचायती राज अधिनियम के सारे नियम कानून को किनारे कर अपना कानून चला रहे कोई अंकुश लगाने वाले नहीं हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचायतों में निर्माण सामग्री, स्टेशनरी, फोटो कॉपी, टेंट, मिठाई व अन्य खर्चों के लिए पंचायत द्वारा जो राशि खर्च की जाती है उसके पक्के बिल, टिन नंबर और जीएसटी पंजीयन वाले दुकानदारों से लेना अनिवार्य है। जिस भी दुकान या फर्म से सामग्री क्रय की जाती है या राशि आहरण के लिए जो बिल लगाए जाते हैं, उस फर्म का पंचायत दर्पण में वेंडर कोड के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता है।
जिनका रजिस्ट्रेशन होगा उनका ही भुगतान होता है, लेकिन सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक द्वारा फर्जी खरीदारी का बिल अगर किसी दूसरे दुकानदार से लेकर भुगतान करवा लेते हैं। जिससे सरकार के टैक्स के साथ-साथ दुकानदारों को कमीशन भी देना पड़ता है व दुकानदार टैक्स भी निर्धारित प्रतिशत से एक दो प्रतिशत अधिक टैक्स ले लेता है!
ग्राम पंचायत के जिम्मेदार खुलेआम शासकीय राशि को खुर्द-बुर्द कर रहे हैं। इसके बाद भी जनपद व जिला पंचायत में बैठे अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।
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