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क्या यह होना चाहिए?
कभी महाराष्ट्र तो कभी पंजाब , ,बिहारियों के लिए जैसे ये देश उनका अपना नहीं रहा, ,क्यों कोई भी कभी भी हमला करके भगाने लगता है?
क्या अब अपराध को किसी क्षेत्र विशेष से जोड़ दिया जाएगा?क्या इस तरह सभी को अपराधी ठहराया जा सकता है?किसी एक की सजा किसी दूसरे को मिले, , इसे जायज कैसे ठहरा सकते हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पांच साल के बच्चे के साथ कुकर्म और फिर उसकी दर्दनाक हत्या के बाद ऐसी स्थिति पैदा हुई है!कहा यह जा रहा है कि,इससे पहले भी गुरदासपुर समेत कई जिलों में इस तरह के मामले आए हैं!
इसके साथ ही पंजाब के कई गाँवों में ग्राम पंचायतों ने प्रस्ताव पारित कर कहा है कि यूपी-बिहारियों को किराए पर मकान न दिए जाएँ! इसके अलावा, बिहारी नागरिकों के राशन कार्ड और वोटर कार्ड न बनाने की भी माँग की जा रही है।
बिहार जैसे राज्यों में राज्य और केंद्र सरकार, दोनों की भागीदारी से सुधार लाने के लिए एक समन्वित प्रयास की तत्काल आवश्यकता है। आखिरकार, भारत अपनी विकास आकांक्षाओं के दसवें हिस्से को वंचित करके अपनी इष्टतम विकास क्षमता प्राप्त नहीं कर सकता।
