https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_nXYDircpji_NBp4Y2oyo8rhVeU-DuXusJaP3AW8


 


 


 

 

*टैक्स तो बीजेपी सरकार ने ही लगाए थे और अब रियायत देकर खुद ही वाहवाही लूटना चाह रहे हैं?* : "अजब गजब राजनीति"

हाल ही में 22 सितंबर से लागू हो रही जीएसटी की नई दरों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम संदेश में 'अगली पीढ़ी के सुधार' बताया गया।

कहा जा रहा है कि,नए जीएसटी की दरों के लागू होने से दैनिक जरूरत की वस्तुएँ और खाने-पीने की चीज़ें सस्ती होंगी,जिससे "गरीब, मध्यम वर्ग, युवा, किसान, महिलाएं और व्यापारी" इससे सीधे लाभान्वित होंगे! दावा तो यह भी किया जा रहा है कि,यह बचत सीधे ग्राहक की  क्रय शक्ति को बढ़ाएगी और बाज़ार में टैक्स से बचा यह पैसा मांग और उत्पादन को बढ़ावा देगा!

इनकम टैक्स व जीएसटी में छूट जोड़कर देशवासियों को 2.5 लाख करोड़ रुपये की बचत का दावा किया जा रहा है!

जीएसटी में हुए बदलाव और उन्हें लागू करने की टाइमलाइन आर्थिक राहत से ज़्यादा राजनीतिक लक्ष्यों को साधने की कोशिश दिखाई देती है?

यहां सवाल यह है कि,इससे आम आदमी को कितना फ़ायदा होगा?क्या ये सुधार बहुत देर से किए गए हैं?

दरअसल कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ कहते यह भी कहते हैं कि इस सुधार की घोषणा का समय आगामी चुनावों के मद्देनज़र मध्यवर्ग में दिख रही बीजेपी की नीतियों के प्रति उपजे आक्रोश को दूर करने के लिए चुना गया प्रतीत होता है!

आज आप देखिए क्षेत्रीय, स्थानीय स्तर पर बीजेपी समर्थक ऐसे जाहिर कर रहे हैं,जैसे  पिछली सरकार ने ये टैक्स लगाए थे और अब बीजेपी सरकार ने इनसे मुक्ति दिलाई है!

हालांकि राजनीतिक विश्लेषको कि माने तो इस बदलाव का व्यापक असर होने में अभी समय लगेगा!जानकर कहते हैं कि,जीएसटी में फैली अनियमितताओं में सुधार बहुत देर से आया!उनका कहना है कि जीएसटी में हुआ सुधार एक आवश्यक क़दम था, लेकिन इसे उठाने में बीजेपी सरकार ने बहुत देर की है!

जारी:

सरकार लघु उद्योगों को समर्थन किस तरह देगी?क्यों कि, , 


أحدث أقدم

📻 पॉडकास्ट सुनने के लिए यहां क्लिक करें।

🎙️ Stringer24News Podcast

🔴 देखिए आज का ताज़ा पॉडकास्ट सीधे Stringer24News पर