“कलेक्टर मैडम, कब जागेंगी आप?”
कलेक्टर के कार्यकाल पर सवाल : रिश्वतखोरी और अव्यवस्था से त्रस्त नरसिंहपुर
नरसिंहपुर जिले की तस्वीर आज प्रशासन की पोल खोल रही है। कलेक्टर शीतला पटले के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और लापरवाही चरम पर पहुंच गई है। जनता का कहना है कि जिले में रिश्वतखोरी अब एक “खुला कारोबार” बन चुकी है, बिना पैसे दिए किसी काम की फाइल आगे नहीं बढ़ती।
सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। शहर की गलियों और मोहल्लों में कचरे के ढेर लगे रहते हैं, सड़कों पर गंदगी से लोगों का जीना मुहाल है। यातायात व्यवस्था का हाल यह है कि चौराहों पर जाम लगना आम बात हो गई है। प्रशासन सिर्फ मीटिंग और प्रेस रिलीज़ में सुधार की बातें करता है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है।
सबसे चिंताजनक स्थिति नशे के कारोबार की है। अवैध शराब, गांजा और कच्ची शराब खुलेआम बिक रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और कलेक्टर आंखें मूंदे बैठे हैं। सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन की नाक के नीचे नशे का यह धंधा बेरोकटोक चल रहा है, तो फिर कानून-व्यवस्था का मतलब ही क्या रह गया?
लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि कलेक्टर शीतला पटले केवल भाषण और दावे करने में व्यस्त रहती हैं। हकीकत यह है कि जिले की जनता खुद को लाचार और ठगा हुआ महसूस कर रही है।
क्या यही है “विकास और सुशासन” का मॉडल, जिसमें भ्रष्टाचार, गंदगी और अव्यवस्था का बोलबाला हो? नरसिंहपुर की जनता अब यह सवाल जोर-शोर से पूछ रही है कि आखिर जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई कब होगी।
नरसिंहपुर में भ्रष्टाचार, गंदगी और नशे का साम्राज्य!
रिश्वतखोरी का राज – बिना पैसा दिए कोई काम नहीं! क्या यही सुशासन है?
सफाई बदहाल – गली-गली कचरे के ढेर, सड़कों पर गंदगी। कलेक्टर मैडम… आंखें बंद क्यों?
यातायात व्यवस्था ध्वस्त – चौराहों पर जाम, दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी। अधिकारी सिर्फ मीटिंगों तक सीमित!
नशे का अड्डा बना जिला – अवैध शराब, गांजा और कच्ची शराब खुलेआम बिक रही है। प्रशासन देख कर भी अनदेखा क्यों कर रहा है?
जनता का सवाल :
“कलेक्टर शीतला पटले, बातें बहुत हो गईं, अब कार्रवाई कब होगी?”
जनता का तंज :
“भ्रष्टाचार चरम पर, व्यवस्था ध्वस्त – कलेक्टर के कार्यकाल को जनता याद रखेगी एक नाकामी के दौर के रूप में!”
