*क्या संतराम उर्फ बडडन सचिव के बहकावे में आ गया?: क्यों नहीं रहा मोतीलाल और बडडन को कानून का खौफ?: ग्राम पंचायत मोहपानी:चिचली:नरसिंहपुर*
हाल ही में मोहपानी मामले में एक नई जानकारी निकल कर सामने आई है!जिस मोतीलाल के खेत में मशीनी तालाब की खुदाई की गई, उस तालाब में संतराम उर्फ बडडन और खुमन बाई के नाम पर भी मजदूरी की राशि आहरित किया जाना दर्शाया गया है।
इस मशीनी तालाब में इन दोनों ने लगभग दो माह तक काम किया! ऐसा हम नहीं बल्कि सचिव के मस्टर बोल रहे हैं!लेकिन जब तालाब निर्माण जेसीबी से किया हो,तब संतराम उर्फ बडडन और खुमन बाई मजदूरी कैसे कर सकते हैं?क्यों की तब तो मशीन से काम किया जा रहा था!
लेकिन यह जानते हुए भी कि, तालाब निर्माण कार्य सचिव द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से कराया जा रहा है,इसके बावजूद मोतीलाल और संतराम उर्फ बडडन और खुमन बाई ने अपने खातों में मजदूरी का आहरण स्वीकार किया!क्यों की कमीशन का लालच हावी था और सरकारी राशि में इस तरह गबन का खेल खेला गया!
संतराम उर्फ बडडन और खुमन बाई और मोतीलाल (जिसके खेत पर मशीनी तालाब का निर्माण हुआ) ने गबन करके अपराधिक कृत्य किया?प्रशासनिक जांच और कार्यवाही के बाद संतराम उर्फ बडडन और खुमन बाई और मोतीलाल दोष सिद्ध होने पर सलाखों के पीछे भेजे जा सकते हैं या फिर रिकवरी और जुर्माना लगाया जा सकता है! अब देखना यह है कि,आने वाले दिनों में प्रशासन क्या कार्यवाही करता है?
इस सब मामले में एक गौर करने लायक बात यह भी है कि, विगत कुछ माह पूर्व ही आदिवासियों ने अपने अधिकार के लिए आवाज उठाई थी और धरना प्रदर्शन किया था,जिसमें अभिषेक ,सुदामा और पवन जैसे युवा शामिल थे,इस उम्मीद के साथ की, कल जब गांव में बदलाव आएगा,विकास की बयार बहेगी,तब हमें भी गांव में मनरेगा मजदूरी मिलेगी,हम अपने माता पिता का भरण पोषण कर सकेंगे और हमें गांव से पलायन नहीं करना होगा!
लेकिन सचिव की मनमानी और तानाशाही का नतीजा है कि,आज इनमें से कुछ युवा गांव से पलायन कर चुके हैं और धरने प्रदर्शन के बाद सरकारी मलाई को गांव के दबंग लोग डकार रहे हैं!
सचिव ने ना सिर्फ युवाओं से उनके सपने छीन लिए,बल्कि इस तरह की कार्यशैली से युवाओं की उम्मीद को ही नेस्तनाबूत करने का प्रयास किया?
कितने रुपए का आहरण दर्शाया जा रहा है और कुल कितने घंटे मशीन चलाई गई?जब हमने इन तथ्यों की गहन पड़ताल शुरू की तब और भी आश्चर्यजनक जानकारियां निकलकर सामने आई! जिससे यह पता चलता है कि,धरना प्रदर्शन स्थानीय राजनीति की शिकार हो गया था और जो चेहरे कैमरे पर चमके थे,वास्तविक लाभ तो वह वर्ग उठा रहा है!
जारी : :
मजबूर आदिवासियों के लुटते हुए गांव को कौन बचाएगा?आज ना आदिवासियों के पास श्मशान घाट है, ना शमशान घाट तक पहुंचने का रास्ता! ना कोई खेल मैदान है और ना पेयजल की उचित सुविधा! क्यों की गांव के दबंगों का कब्जा चारों तरफ है?आदिवासी किस किस से लड़ेंगे?
