*चौपाटी पर पसरी गंदगी, चटपटे व्यंजन के लोभ में बीमारी को न्योता ?:नरसिंहपुर।*
चौपाटी पर नाली में पानी निकासी की व्यवस्था बेतरतीब तरीके से बनाई गई है।इसके कारण चौपाटी में ग्राहकों से बचा हुआ खाद्य पदार्थ नाली में भरा रहता है। इस वजह से चौपाटी में दुर्गंध फैली हुई है। दुर्गंध से स्थानीय दुकानदार व ग्राहकों को भी परेशानी है।
यहां नगर पालिका ने नालियों की साफ-सफाई नहीं कराई है। इसको लेकर किसी का ध्यान नहीं है।
व्यवसायियों का कहना है कि यही हाल रहा तो चौपाटी का नाम ही सिर्फ लोगों की जुवान पर रह जाएगा इसका अस्तित्व खतरे में है।
खाद्य विभाग की लापरवाही के चलते चौपाटी अपनी बदहाली पर आसूं बहा रही है।गंदगी और दूषित पानी निकासी की समस्या संक्रमण का कारण बन सकती है और आप फूड पॉइजनिंग का शिकार हो सकते हैं।
प्रशासन की लापरवाही और खाद्य विभाग की लचर कार्यशैली के चलते फूड पॉइजनिंग के मामलों में वृद्धि हो सकती है।
शहर के बाशिंदों को मिलावटी वस्तुओं का सेवन करना पड़ रहा है।आटा, मैदा, सूजी, पीसी हुई धनिया, मिर्ची, हल्दी, मसाले, डालडा, घी आदि वस्तुओं में मिलावट का खेल बदस्तूर जारी है।लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
दूध, दही, पनीर, नमकीन इत्यादि सहित अन्य खाद्य सामग्रीयां बाजार में खुले आम बेची जा रही है।सस्ते माल के नाम पर दुकानदार जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। कंदेली,पुराना बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन क्षेत्र के आस पास सस्ते माल के नाम पर जहर का कारोबार करने वालों की अनेक दुकाने हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है जैसे,मिलावट खोरों के आगे खाद्य निरीक्षण विभाग भी बौना साबित हो रहा है।
जब हमने इस बारे में स्थानीय लोगों से बात की तब वार्ता के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों की सांठगांठ से बर्षों से खेल चल रहा है।लेकिन खाध एंव औषधि विभाग हाथ पे हाथ रखें बैठा है।
लोगों को पैसे खर्च करने के बाद भी खाने, पीने की चीजें सही नहीं मिल रही हैं।त्यौहार आते ही खानापूर्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सैंपल भरते हैं लेकिन सेंपल की रिपोर्ट सार्वजनिक करने से अधिकतर बचते हुए नजर आते हैं। खाद्य विभाग की सुस्त रफ्तार और ढुलमुल रवैये के चलते मिलावटखोरों में कानून का भय लगभग खत्म हो चुका है यही वजह है की ये लोग खुलेआम खाद्य पदार्थों में मिलावट कर रहे हैं।
