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*भ्रष्टाचार की बहती गंगा में डुबकी लगाते अधिकारी!:नरसिंहपुर*

कागजी विकास के सच्चाई की परत दर परत तब उजागर होती है, जब आप धरातल पर जमीनी हकीकत से रूबरू होते हैं! अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के विकास का दावा चुनावी जुमले से अधिक और कुछ साबित नहीं हो रहा है!

जिले की ग्राम पंचायतों में पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान तकरीबन १०० करोड़ रुपए से अधिक का गबन कर दिया जाता है! यदि आपने नरसिंहपुर जिले की खबरों पर जरा भी गौर किया हो तो आप पाएंगे कि पिछले तीन सालों के अंदर ही करोड़ों के गबन की अनेकों शिकायतें जिले की विभिन्न क्षेत्रों से सामने आई! कुछ ग्राम पंचायतों को रिकवरी नोटिस जारी किए गए और यह प्रक्रिया अब भी कच्छप गति से चल रही है!

अब सवाल यह उठता है कि,क्या अधिकारी नशा करके कुर्सी पर बैठते हैं?आखिर कैसे अधिकारियों की नाक की नीचे गबन का खेल चलता है?क्या अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर भी रहे हैं?जब हम्माम में सब नंगे हो तो कौन किसको क्या बोलेगा? हैं तो आखिर सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे!

हाल ही में चिचली जनपद की मोहपानी,धमेटा,बसुरिया,बारछी एवं कुछ अन्य ग्राम पंचायतों में गबन का खुलासा हुआ। हालाकि प्रशासन जांच और कार्यवाही का दावा कर रहा है लेकिन यह कठपुतली के तमाशे से अधिक कुछ नहीं!

जनपद चिचली सीईओ धनीराम उईके की नाक के नीचे ग्राम पंचायत फर्जीवाड़ा कर रही थी!फर्जी मस्टर,बिल लगाए जा रहे थे, बाहरी मजदूरों से मनरेगा मजदूरी कराए जाने के नाम पर गबन का खेल खेला जा रहा था,तब जनपद के ये अधिकारी किस तरह अपना काम कर रहे थे?

महिला सरपंच के नाम पर लोकतंत्र से खिलवाड़ किया जाता रहा,तब भी महिला सशक्तिकरण की मूलभावना को बचाने की एक भी कोशिश नहीं की गई!क्यों?क्यों महिला सरपंच आज भी हाशिए पर हैं?क्या इसके लिए जनपद सीईओ धनीराम उईके खुद दोषी नहीं है?क्या नैतिकता के आधार पर चिचली जनपद सीईओ धनीराम उईके को स्वयं अपना इस्तीफा विभाग को नहीं सौंप देना चाहिए?

।। विवेचना।।

जारी : 



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