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*महिलाओं के मुद्दों पर क्या है महिआओ की राय?:नरसिंहपुर*

किसी शादीशुदा महिला/पुरुष से प्यार सही या गलत? अट्रैक्शन एक ऐसी चीज है, जो किसी को कभी भी हो सकती है। हालाकि आज कानून के मुताबिक महिला और पुरुष दोनो को समान अधिकार प्राप्त है।

शादीशुदा से प्यार सही या ग़लत?

वैसे तो यदि आपका प्यार नि:स्वार्थ है तो प्यार करना कोई पाप नहीं है। पर प्यार के नाम पर किसी के साथ गलत करना या फिर उसका इस्तेमाल करना चाहे वह शरीरक तौर पर हो या आर्थिक तौर पर वह गलत नहीं पाप है अपराध है।

ऐसे अनेक मामलों पर कोर्ट ने कहा भी है कि अगर दो व्यक्ति विवाह नामक संस्था में रहते हुए भी आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो वह अपराध नहीं है।

लेकिन पुरुषों और महिलाओं के लिए समाज में अलग अलग पैमाने है।लिहाजा पुरुष शादी के बाद अफेयर में है तो कुछ बुराई नहीं वहीं लेकिन महिला शादी के बाद अफेयर में है तो उसे पाप और पुण्य से जोड़ दिया जाता है?

प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती, कोई सीमा नहीं होता लेकिन अगर प्यार किसी गलत इंसान से हो जाए तो?कई महिलाएं शादीशुदा पुरुष के चक्‍कर में पड़ कर अपनी जिंदगी खराब कर लेती हैं।कई लोग यह भी मानते हैं कि जो पुरुष अपनी पत्नी का न हुआ वह दूसरी महिला का क्या होगा?

क्या होता है जब एक शादीशुदा महिला शादी के बाद खुद को इनसिक्योर महसूस करती है? किसी को फिजिकल या मेंटली एब्यूज करने वाला कोई भी शख्स सही कैसे हो सकता है? तब ऐसे में एक औरत अपनी जिंदगी को फिर शुरू करना चाहती है वह प्यार करना चाहती है!

ऐसे में एक लड़की की ज़िंदगी को बरबाद करने का दोषी कौन है?शारीरिक संतुष्टि भी पति-पत्नी के रिश्तों में महत्वपूर्ण है। दोनों में इसकी कमी से आकर्षण कम हो जाता है।ऐसा देखा गया है कि बच्चे के जन्म के बाद मर्द अपनी पत्नी से दूर जाने लगते हैं, ऐसे मामलों में भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की ओर रुख होने लगता है।

प्लेजर लेने के लिए भी महिलाओं को अधिक भावनात्मक संबंध, बातचीत और गहरे बंधन की आवश्यकता होती है लेकीन जब पति शराब पीने का आदि हो या फिर पत्नी को टॉर्चर करता हो तब ऐसे में भावनात्मक संबंध समाप्त हो जाते हैं।यह एक रिश्ते में नहीं होता, बल्कि ज्यादातर लोगों के साथ ऐसा होता है।

आजकल शादी के बंधन भी झूठ के सहारे बनाए जा रहे हैं,उनके लिए शादी का रिश्ता महज एक मजाक बन कर रह गया है।वैवाहिक संबंधों के मामलों में झूठ का सहारा लेना अत्यंत दुखदाई साबित होता है और अधिकतर इस झूठ का खामियाजा भुगतना पड़ता है औरत को उसकी जिंदगी नरक हो जाती है।वस्तुतः विवाहोपरान्त किसी रिश्तेदार या अन्य माध्यम से जब प्रभावित पक्ष को झूठ का पता चलता है, तो वह ठगा-सा महसूस करता है।

वहीं यदि रिश्तों के इस सामाजिक ताने बाने पर गौर करें तो :

पुरूष प्रधान समाज में एक नारी का स्थान निचले पायदान पर है,भले ही आज कानून ने महिलाओं को अनेक अधिकार दिए हैं लेकिन फिर भी महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में इजाफा हुआ हुआ है।

मेरी पत्नी है, मैं चाहूं तो मार सकता हूं,सजा दे सकता हूं,जैसी मानसिकता से ग्रस्त पितृसत्तात्मक पुरूष प्रधान समाज महिलाओं के बराबरी के अधिकार को अप्रत्यक्ष रूप से सिरे से खारिज कर देता है और शायद यही वजह है की ,पति अपनी पत्नी को उपभोग की वस्तु या फिर स्पष्ट शब्दों में कहें तो सैक्स मशीन से ज्यादा कुछ नहीं समझता है।

चूंकि औरत समाज में माता पिता की इज्जत,बच्चों का भविष्य और ससुराल से ही अर्थी उठती है जैसी धारणाओं के चलते चुप रहती हैं और प्रताड़ना सहती रहती हैं।कभी कभी तो पति द्वारा इतने वहशियाना तरीके से मारपीट की जाती है की,पत्नी के शरीर पर चोटों के निशान खुद ही चीख चीख कर प्रताड़ना,उत्पीड़न,शोषण की गवाही देते हैं।

निलिमा 39 वर्षीय गृहणी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि,मेरे पति मजदूरी करते हैं,अक्सर शाम को नशे में धुत होकर घर लौटते हैं,कभी कभी वो पड़ोसियों के सामने ही मुझसे अश्लील हरकतें करने लगते हैं और जब मैं मना करती हूं तो मुझे मारते हैं। नीलिमा बताते हुए रो पड़ीं की,अभी कुछ दिनों पहले जब वो नशे में धुत होकर दोपहर को घर आए तो मैंने डर के मारे दरवाजा बंद कर लिए,तब वह लाठी से दरवाजे को पीटते हुए चिल्लाने लगा की ,मुझे अभी तेरे साथ सोना है(संबंध बनाना है)।जबकि इस समय पूरा मोहल्ला तमाशा देख रहा था,और घर पर मेरे साथ मेरी नौ वर्षीय बेटी भी थी।मेरे पति को ना मेरे सम्मान का ध्यान था और ना ही मोहल्ले या बिटिया का।

रागिनी 42 वर्षीय घरेलू कामगार महिला कहती हैं की, मैं सिर्फ एक जिंदा लाश बनकर रह गई हूं।पति फेरी लगाकर सब्जी बेचने का काम करता है।शुरुआत में तो सबकुछ ठीक था,लेकिन धीरे धीरे पति की आदतों में बदलाव आने लगा,वह आए दिन किसी न किसी बात पर मुझसे लड़ाई करते और मारपीट पर उतारू हो जाते।जैसे किसी साइको की तरह।जानवरों की तरह मारने के बाद कहते की, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूं,और प्यार में तो पत्नी पर हाथ उठाने का अधिकार होता ही है और मैं सोचती रह जाती की यह कैसा प्यार और कैसा जीवन है?

ऐसा नहीं है की मारपीट का शिकार सिर्फ घरेलू महिलाएं है,बल्कि वे महिलाएं भी जो आत्म निर्भर हैं(किसी जॉब में है) उन्हे भी पति के हाथों कभी ना कभी हिंसा का शिकार होना पड़ता है।

मैं तो अपनी पत्नी को जूते की नोक पर रखता हूं,आपने भी कभी ना कभी इस तरह के शब्द सुने ही होंगे। पत्नि को जूते की नोक पर रखना,उसके साथ मारपीट करना या उसे सेक्स मशीन समझना शादीशुदा महिला के लिए प्यार का हिस्सा नहीं है,भले ही लोग या समाज पति द्वारा हाथ उठाने पर तर्क देता हो की,यह तो पति का अधिकार है।

पूजा 25 वर्षीय कामकाजी महिला है, वे एक स्थानीय प्रतिष्ठान में काम करती हैं,जहां अक्सर उन्हें काम के चलते देर हो जाती है,कई बार नाइट ड्यूटी भी करनी पड़ती है। दोनों ने तकरीबन दो वर्ष पूर्व ही लव मैरिज की थी,लेकिन शादी के बाद पति का असली चेहरा सामने आया।वह बात बात पर शक करने लगा,मुझे ताने देने लगा,जब मैंने विरोध किया तो मुझे वहशियों की तरह मारा पीटा गया।पति की शक की आदत से तंग आकर जब मैंने काम छोड़ने का विचार किया तो मुझे लाठी से पिटाई की गई,ताकि मैं काम ना छोड़ूं।मेरा जीवन जीते जी नर्क बन गया। अब ना मैं जी पा रही हूं, ना मर पा रही हूं।मायके वाले मेरा समर्थन नही करते हैं, वो कहते हैं की,पति है,अगर मारता ही है तो इसमें नया क्या है।

।। निजता और गोपनीयता के नीति नियमों के तहत स्थान और पात्र के नाम परिवर्तित कर दिए गए हैं।

।। समीक्षा।। जारी :

















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