*आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मनमानी: बच्चो के हिस्से का छीन रही दाना पानी:ग्राम पंचायत मोहपानी: बड़ागांव:जनपद चिचली:नरसिंहपुर*
शासन द्वारा नौनिहालों के शारीरिक और मानसिक विकास कि दिशा में और नौनिहालों को उचित पोषक आहार के साथ अच्छी प्रारंभिक शिक्षा मिल सके इसके लिए क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए थे। लेकिन केंद्र पर कार्यरत कार्यकर्ता और सहायिका के साथ पर्यवेक्षक की अनदेखी के कारण आंगनबाड़ी केंद्र समय पर नहीं खुल रहे हैं। स्थिति यह है कि है कि केंद्र के गेट पर ताले लटकते रहते हैं। जिसके कारण बच्चों के अभिभावकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले बच्चों की उम्र 0 से 6 वर्ष की होती है. इस आयु वर्ग के बच्चों को पोषण आहार दिया जाता है।शून्य से 3 वर्ष तक के बच्चों को पोषण आहार वितरण की योजना है जबकि तीन से 6 वर्ष तक के बच्चों को गर्म भोजन देने की व्यवस्था आंगनबाड़ी केंद्र में रहती है।हालांकि, नियमित अंतरणों पर पोषण आहार, गर्म भोजन वितरण में गड़बड़ी और कोताही बरते जाने की शिकायतें विभाग को मिलती हैं।आंगनबाड़ी केन्द्रों में मनमानी का आलम है। यही कारण है कि करोड़ों की योजनाओं के बाद भी कुपोषण खत्म होने की जगह और पैर पसारता जा रहा है।
जब हमने नरसिंहपुर जिले की चिचली जनपद के ग्राम पंचायत मोहपानी के ग्राम बड़ागांव में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र का जायजा लिया तो अनेक तरह की अनियमितताएं पाई गई।स्थानीय ग्रामीणों ने बताया की केंद्र पर हमेशा ही ताला लटकता रहता है, और ना ही बच्चों को पोषण सामग्री अथवा अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।कुपोषण के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील मानी जाने वालीं इन भारिया आदिवासियों की बस्तियों में बच्चों को कुपोषण से बचाने की सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई है!सुपरवाइजर द्वारा विगत 6 माह से केंद्र का निरीक्षण नहीं किया गया!जबकि यह उनका दायित्व बनता है कि समय-समय से केंद्रों का निरीक्षण करे ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन शासन की मंशानुसार हो सके।
इलाके की गर्भवती महिलाओं,किशोरियों और छोटे बच्चों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।जिससे ना केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बल्कि पर्यवेक्षक की भी बड़ी लापरवाही खुलकर सामने आ रही है।
विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बड़ागांव में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र कभी-कभार ही खुलते हैं। इस कारण से बच्चों को शासन की ओर से मिलने वाला पोषण आहार भी नहीं मिल पा रहा है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका द्वारा बाजार में बेच दिया जाता है। इसके अलावा जब पोषण आहार एक्सपायर हो जाता है,तब उसको केंद्र के कर्मचारी कचरे में मवेशियों को फेंक देते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पर पोषण आहार का वितरण हो रहा है उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है। परंतु सुपरवाइजरों और परियोजना अधिकारी के पास इतना समय नहीं है कि वह शहरी क्षेत्र के हों या ग्रामीण क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र उनका निरीक्षण कर सकें।
अब देखना यह हैं की यह आंगनबाड़ी केंद्र कब तक इसी तरह मनमानी चलता रहता है और नौनीहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता रहता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि,दिनांक 9/9/24 से लेकर दिनांक 14/9/24 तक मोहपानी पंचायत के ग्राम पटकना (बड़ा गांव) में भारिया आदिवासियों तक शासन की योजना पहुंचाने और समस्याओं के निराकरण हेतु जन मन शिविर का आयोजन किया गया,ताकि भारिया आदिवासी समुदाय को मुख्य धारा से जोड़ा जा सके।इसी शिविर के दौरान जब ग्रामीणों ने अपनी समस्या को अधिकारियों के सामने रखा तब अधिकारियों के भी होश फाख्ता हो गए।दरअसल ग्रामीणों ने बताया कि आगनगाड़ी कार्यकर्ता सरोज वंशकार कभी केंद्र पर आती ही नहीं है,बच्चों को दिया जाने वाला अनाज,दूध,नाश्ता, पोषण आहार कहां जाता है,क्यों की बच्चों तक तो कुछ भी पहुंच ही नही रहा है।तब मौके पर मोजूद अधिकारियों ने तत्काल पंचनामा बनाने के लिए आदेशित किया और सरपंच सचिव की और स्थानीय ग्रामीण राजवली,लक्ष्मी, रमेश,लखन के साथ अन्य ग्रामीणों की भी मोजूदगी में पंचनामा तैयार कर जानकारी उच्च अधिकारियों तक प्रेषित की गई।
जनपद सीईओ धनीराम उईके भी जन मन शिविर की एक औपचारिक यात्रा के दौरान बड़ागांव के मामले की गंभीरता से परिचित हो चुके हैं!मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनपद सीईओ द्वारा तात्कालिक रूप से आवश्यक दिशा निर्देश भी जारी किए गए।
जारी :
सरोज वंशकार के कदाचरण पर अंकुश लगाने के लिए पद से पृथक, , ,
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