*गरारू हुआ बीमारु!:सरपंच पति की ख्वाहिश: किस किस का हिस्सा मारुं?: जनपद नरसिंहपुर*
ग्राम पंचायत गरारू में नाली निर्माण और ग्राम बमहौरी में सामुदायिक भवन निर्माण मामले में बरती गई अनियमितताओं पर अधिकारियों की चुप्पी अनेक सवाल खड़े कर रही है। सरपंच पति और सचिव पर जांच अधिकारी मेहरबान दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों के चुने हुए नुमाइंदे गांवों के विकास के लिए मिलने वाली ग्रांट पर गिद्ध दृष्टि रखते है और मौका मिलते ही हडपने का काम करते है। ऐसे घोटालेबाज सरपंचो को पंचायत विभाग के भ्रष्ट कर्मचारियों का पूरा सहयोग मिलता है।
सरपंच पति, उप सरपंच और सचिव की काली करतूत के खुलासे के बावजूद इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता के वावजूद जांच अधिकारी द्वारा ग्राम प्रधान और सचिव को बचाने मे पदीय अधिकारों का खुला दुरूपयोग किये जाने की खबर है।
प्रशासनिक अधिकारियों से जब इस मामले की घपले को लेकर बात की गई, तो कोई बयान सामने नहीं आया। गरारू में विकास गाथा कागजों पर लिखी जा रही है और अधिकारी धृतराष्ट्र बने बैठे हुए हैं। जनपद पंचायत और जिला पंचायत में लिखित शिकायती आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
वहीं इस मामले में जानकारों का कहना है कि मामले में जनपद सीईओ धारा 40 के तहत् कार्यवाही हेतु एसडीएम के पास अनुशंसा कर जांच रिर्पोट भेज सकते हैं। वहीं शासकीय राशी गबन के मामले में भी धारा 92 के तहत् भी कार्यवाही हो सकती है। सचिव के निलंबन एवं अन्य कार्यवाही हेतु भी विचार किया जा सकता है
हालाकि ग्रामीणों का कहना है कि,अब इनके कारनामों की गाथा जिला पंचायत सीईओ नहीं बल्कि संभागायुक्त जांच तलब करके खुद जांच करे तो कई कारनामों से पर्दा उठेगा। भ्रष्टाचारियों पर लगाम लगा पाने में स्थानीय प्रशासन विफल है।