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*कागजी घर में कैसे रहें साहब?*

सवाल जितना अटपटा लग रहा है,उससे कहीं अधिक पेचीदा है इसका जवाब!दरअसल नरसिंहपुर जिले की जिन ग्राम पंचायतों में कागजी प्रधान मंत्री आवास बने हैं,वहां के लोगों की अपनी ही उलझन है! जिस पर हम आगे चर्चा करेंगे।

फ़िलहाल तो यह सवाल तो सबसे बड़ा है की, अब मानसून ज्यादा दूर नहीं है,तब ऐसे में उन प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों का क्या होगा?जिनके आवास कागजों पर बने हैं और राशि को सरपंच, सचिव ने हड़प लिया है! आप यह पढ़कर इतना हैरान क्यों हो रहे हैं?क्या आप रीछा और महगुवां निजोर के गबन को भूल गए?

हालाकि यह सिर्फ दो ग्राम पंचायत ही नही हैं जहां प्रधानमंत्री आवास की राशि को सरपंच,सचिव ने हड़प लिया,बल्कि इस फेहरिस्त में आने वाली ग्राम पंचायतों की सूची लंबी है!

अब मसला यह है की, इन कागजी प्रधानमंत्री आवास में गांव के गरीब कैसे रहें? इस सवाल का प्रशासन के पास है कोई जवाब?या फिर सिर्फ आंकड़े दिखाकर झूठी वाहवाही लूटने में लगा हुआ है जबकि सच्चाई को अनदेखा किया जा रहा है!

नरसिंहपुर जिले में भ्रष्टाचार नित नए आयाम स्थापित कर रहा है!अधिकारियों ने देखना,सुनना बंद कर दिया है, जब तक की गुलाबी पत्ती के दर्शन ना हो जाएं? लिफाफों के बोझ तले अधिकारी इस कदर दबे हुए हैं,की शिकायतों को अनदेखा करने में ही अपनी भलाई समझते हैं?

क्या आपको नहीं लगता कि,यह अधिकारियों की ही हौसला अफजाई का नतीजा है की,आज नरसिंहपुर जिले की अनेक ग्राम पंचायतों में अंधेर राज चल रहा है?कहीं सरपंच को रबर स्टाम्प बना दिया तो कहीं सरपंच पति ने अपनी हुकूमत का जलवा दिखाया और कहीं कोई तीसरा ही पंचायत चला रहा है! महिला सशक्तिकरण का तो नरसिंहपुर जिले में जिस तरह मखौल उड़ाया जा रहा है वह ना सिर्फ शर्मनाक है बल्कि चिंताजनक भी हैं!

सेवा के नाम पर ना सिर्फ मेवा डकार गए बल्कि मुफ्त की रेवड़ियों में भी हिस्सा मार लिया!कभी हिस्सा,कभी कमीशन, कभी लिफाफे और कभी विज्ञापन से सब सेट कर लिया!

कागजी निर्माण में सिर्फ प्रधानमंत्री आवास ही शामिल है,यह सोचने की भूल मत कर बैठियेगा! इस फेहरिस्त में आंगनबाड़ी से लेकर तालाब निर्माण, वर्क्षारोपण जैसे अनेक कार्य शामिल हैं!लेकिन बेचारे उन गरीब गांव वालों के सर पर तो पहाड़ टूट पड़ा,जिनके नाम कागजी आवास की सूची में हैं!सरपंच से शिकायत करो तो वह कहता है, सचिव और जीआरएस जाने! सचिव से सवाल करो तो,वह कहता है यह मेरे कार्यकाल की बात नही है,अधिकारी से बोलो तो कहते हैं,मामले को दिखाते हैं,जल्द ही कोई विकल्प ढूंढ लिया जाएगा, जन सुनवाई में भी सिर्फ आश्वासन और सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत के बाद दबाव और प्रलोभन मिलता है!

क्या इस तरह मिलेगा किसी गरीब को न्याय?वैसे भी गरीब को न्याय मिलता ही कब है?न्याय मिलने का झुनझुना अवश्य मिलता है!

।। विवेचना ।।
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