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*विकास कागजों पर? : भ्रष्टाचार धरातल पर!*

लोगों को अराजकता,अव्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता की इतनी आदत हो गई है कि वो इस बारे में अब सोचते भी नहीं है, उन्हें पता है कि अधिकारी कुछ करेंगे भी नहीं तो शायद इसलिए उन्होंने अपने हक़ की बात करनी भी बंद कर दी है।

शहर से फुटपाथ गायब होते जा रहे हैं,जिससे नागरिक परेशान होते हैं। इस परेशानी की ओर प्रशासन ने ध्यान देना बंद कर दिया है।यातायात अमला लापरवाह बना हुआ है। शहर के ज्यादातर फुटपाथ पर तो लगातार अतिक्रमण होता जा रहा है।

नगर पालिका को वाहन हटाने की कार्रवाई करना चाहिए। एक अभियान चलाते हुए फुटपाथ खाली कराए जाने चाहिए लेकिन अधिकारी खानापूर्ति से ही काम चला लेते हैं!

वहीं हाल में लाखों की लागत से बनी मजबूत सड़कों को भी बख्शा नहीं जा रहा है। शहर में सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़क को खोद दिया गया और सड़कों को लीपापोती कर छोड़ दिया गया।अब सड़क की सुंदरता पर चार चांद नही थेगड़े नजर आते हैं।

विभिन्न स्थानों पर बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बदहाल है।कहीं पानी की व्यवस्था नहीं है, तो कहीं टूटियां गायब हैं ,और कहीं पर पानी के पाइप टूटे पड़े हैं। शहर को स्वच्छ बनाने और सार्वजनिक शौचालयों/मुत्रालयो की स्थिति बेहतर रखने की दिशा में कोई प्रयास नहीं हो रहे।अधिकारी व्यवस्था बनाने के लिए प्रयास तक नहीं कर रहे।

शहर की लगभग हर सड़क पर आवारा मवेशियों का आतंक है,लेकिन स्थानीय प्रशासन का इस ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं है।सड़क पर मवेशियों के होने की वजह से यातायात भी अवरूद्ध होता है।इनसे होने वाले नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है?

पंडाल गेट सड़क पर होने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होना बड़ी हैरानी पैदा करती है।पंडाल लगाने से हुए ध्वनि और वायु प्रदूषण का मूल्यांकन कैसे करेंगे अधिकारी?प्रशासन की नियम कायदों के बाद भी पंडालों पर नियम का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है।ध्वनि प्रदूषण के बारे में शिकायत करने के लिए आप पुलिस की मदद ले सकते हैं या फिर किसी वकील की मदद से नजदीकी जिला मजिस्ट्रेट के कोर्ट में जा सकते हैं। हाल ही में इस समय शहर में दुर्गा पंडालों की सजावट को लेकर देखा जा रहा है, पंडाल खड़े करने के दौरान सड़क,फुटपाथ और पेबर ब्लॉक को क्षति पहुंची।जिसे अनदेखा कर दिया गया।

क्या शासकीय संपत्ति के इस नुकसान के जिम्मेदार हम नही है। एक बार सड़क,फुटपाथ और पेबर ब्लॉक में गड्ढा हो जाने के बाद फिर आसपास के हिस्से भी उधड़ने लगते हैं।जिससे न सिर्फ शासकीय संपत्ति का नुकसान होता है,बल्की आगामी दिनों में जान माल को नुकसान पहुंचाने वाली स्थितियां भी पैदा होती है।








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