*कामकाजी महिलाओं को अपने काम के दौरान सहना पड़ता है यौन उत्पीड़न?*
देखिए यह एक बेहद गंभीर मामला है। जब हमने हॉस्पिटल, मॉल, रेस्त्रा, शो रूम में काम करने वाली युवतियों और महिलाओं से इस बारे में बात की तो जो सच सामने आया वह किसी भी युवती/महिला या सहृदय व्यक्ति के लिए बेहद ही शर्मनाक है।
हम यहां उन युवतियों और महिलाओं के नाम और स्थान को परिवर्तित कर रहे हैं ताकि युवतियों और महिलाओं की सुरक्षा और निजता का हनन न हो।
एक निजी चिकित्सालय में स्टाफ नर्स का काम करने वाली महिला अर्पिता ने बताया कि, एक बार उसके जन्मदिन के अवसर पर स्टाफ के ही एक कंपाउंडर का काम करने वाले युवक द्वारा विश करने के बहाने जबरदस्ती kiss करने की कोशिश की गई। मैं उसे मना करती रही लेकिन स्टाफ के बाकी लोगों के सामने उसने मुझे फर्श पर धकेलकर kiss किया। मैं काफ़ी दिनों तक सहज महसूस नहीं कर पाई, शर्मिंदगी के उस अहसास से उबर पाना इतना आसान नहीं था।अर्पिता कहती हैं कि ऐसा नहीं है की सभी लोग खराब हैं, लेकिन अक्सर हमें इस तरह की घटनाओं का सामना करना पड़ता है जब हम उत्पीड़न का शिकार होते हैं।हमें इन घटनाओं को अनदेखा करने की कोशिश करनी पड़ती है। बातचीत के दौरान अर्पिता कहती हैं कि आखिर हम कहां कहां से काम छोड़ेंगे?ऐसे हालात तो हर जगह मौजूद हैं ही।
रेस्त्रां में रिसेप्शन का करने वाली 23 वर्षीय युवती शैली बताती हैं कि हमारे यहां स्टाफ बहुत अच्छा है, लेकिन कभी कभी रेस्त्रां में आने वाले कुछ ग्राहक अपनी मर्यादा को लांघने की कोशिश करते हैं।किसी ना किसी बहाने वे शरीर को छूने की कोशिश करते हैं।मुझे हैरानी होती है कि,आखिर ऐसे लोग हमें समझते क्या है? हम भी आप ही की तरह अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए काम करती है।
स्थानीय मॉल में काम करने वाली 30 वर्षीय सुनैयना का कहती हैं कि ऐसे मामलो मे अक्सर खामोशी ही रखनी पड़ती है। हम शिकायत करें तो किस किस की और कितनी बार? लोग हमारा ही मजाक बनाने लगते हैं। हमें गंदी नजरों से देखा जाता है। आजकल बहुत ओवर टाईम कर रही हो, रेट क्या चल रहा है तुम्हारा? इस तरह की घटिया द्विअर्थी ताने कसे जाते हैं।
32 वर्षीय मंजूषा कहती हैं काम के स्थान पर यौन उत्पीड़न से लड़ना आसान नहीं है।यौन उत्पीड़न की घटनाओं का शिकार युवतियां, महिलाएं अक्सर डिप्रेशन और सदमे की शिकार हो जाती हैं। वजह साफ़ है कि यदि हम अपने पति से ये बातें शेयर करना चाहें तो घरेलू हिंसा की दोहरी मार झेलनी पड़ती है वहीं हमारे ही चरित्र पर उंगलियां उठाई जाने लगती है।ऐसे में हम क्या कर सकती हैं?बर्दाश्त करने की भी क्षमता होती है।
19 वर्षीय अनामिका कहती हैं कि , कभी कभी जबरदस्ती दोस्ती करने की कोशिश की जाती है,फोन पर गंदे मैसेज भेजे जाते हैं। दोस्ती के लिए मना करने पर स्टाफ पॉलिटिक्स का शिकार होना पड़ता है। कभी कभी स्टाफ के कुछ लोगों का दोस्ताना रवैया अक़्सर सीमाएं पार कर जाता है।जो हमारे लिए परेशानी का कारण बन जाता है। आप इन सब बातों को अनदेखा नहीं कर सकते हैं।
रश्मि ने अपनी जॉब छोड़कर सिलाई का काम शुरू किया।वे इसकी वजह बताते हुए कहती हैं कि,एक लड़की होने के नाते बहुत डर लगता है, जब मैं सड़कों पर चल रही होती हूं और कोई मुझे तंग करता है तो मैं डर जाती हूं, इसी वजह से मैं अधिकतर बाहर जाना नहीं चाहती हूं।
जारी :
