चुनाव में पैसे का बोलबाला!
जैसे जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आती जा रही हैं, राजनीतिक दलों ने भी मतदाताओं को रिझाने के प्रयास तेज कर दिए हैं ,ऐसे में संभव है कि ,सत्ता और धन बल से वोटरों को प्रभावित करने के नए-नए पैंतरे आजमाए जायेंगे?
इस बार भी राजनितिक दल लोगों को लुभाने में लग गए हैं, जानकारों की माने तो ये सबसे महंगा चुनाव होने वाला है।
पैसा और शराब बांटकर चुनाव जीतना एक ऐसी समस्या है ,जो हर बार बढ़ती जा रही है।अब तो लोग भी कहते हैं की,पैसा कोई भी दे रख लेना है, वोट किसे देना है यह बाद में देखेंगे। हालाकी वोटर को लालच देने का चलन काफी पुराना है,यह कोई नई बात हरगिज नहीं है।
वैसे तो माना जा रहा था कि राजनीतिक दल अपने अनाश-शनाप खर्चों पर अंकुश लगाएंगे, मतदाताओं को रिझाने के लिए नगदी, शराब और दूसरे नशीले पदार्थ नहीं बांटेंगे लेकिन इस तरह की प्रवृत्ति में बढ़ोत्तरी देखा जाना न सिर्फ राजनीतिक दलों की ढिठाई जाहिर करता है, बल्कि यह निर्वाचन आयोग के लिए भी एक कड़ी चुनौती है।
जो लोग करोड़ों खर्च करके चुनाव जीतते हैं, उनसे ईमानदारी की आशा भी कोई कैसे करे?क्या वाकई मतदाता ऐसे उम्मीदवारों को नकार देगा, जो वोट पाने के लिए लोगों को शराब पिलाते हैं व पैसा बांटते हैं?
हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करे और वोट अवश्य डालने जाए और किसी भी प्रकार के लालच से मुक्त होकर अपना प्रतिनिधि चुनें।
ज़ारी :
नशेड़ी वोटर : तमाम उम्मीदवार शराब के शौकीनों को मुफ्त में खान-पान की व्यवस्था करते हैं?
