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नरसिंहपुर जिले का ग्राम केरपानी पवित्र नर्मदा के साथ ही जाना जाता है अवैध शराब के गढ़ के रूप में।नरसिंहपुर से केरपानी ग्राम क्षेत्र में प्रवेश करते ही स्कूल के तिराहे से लेकर पान के टपरे के आस पास सड़क के किनारों और पुल के समीप नर्मदा तट पर देशी शराब और गोवा की खाली बोतलें,डिस्पोजल ग्लास और पानी पाउच बिखरे दिखाई देते हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि आखिर दिन दहाड़े खुलेआम पंचायत क्षेत्र में किसकी शह पर अवैध शराब की बिक्री की जा रही है।नाम ना छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति विरोध करता भी है तो उसे तरह तरह से प्रताड़ित किया जाता है।गाली गलौज डराना धमकाना से लेकर मारपीट तक की जाती है।

अवैध शराब बिक्री की वजह से ग्रामीणों में शराब की लत भी तेजी से फैली है नतीजतन पारिवारिक कलह और मारपीट की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है।जिसकी वजह से ग्रामीणों में भय का माहौल व्याप्त है।सोशल मीडिया पर भी जागरूक एवम प्रबुद्ध वर्ग द्वारा जुए के काले कारोबार का विरोध किया जा रहा है।

दबी जुबान में ग्रामीणों ने स्वीकार किया की पानी में रहकर मगर से बैर कौन करे की तर्ज पर खामोश रहना ही उचित है क्यों की शिकायत करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है जिसकी वजह से काले कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं व शिकायत कर्ता को जान से मारने की धमकी देने से भी गुरेज नहीं करते हैं।

विगत कुछ वर्षों से सुरवारी,नयागांव, बेदू,बरहेटा इत्यादि अनेक गांवों से लगातार अवैध मादक पदार्थों की बिक्री की खबरे अखबारों की सुर्खियों का हिस्सा बनती रही है लेकिन जिम्मेदार अशिकांशतः स्थिति से अनभिज्ञ नज़र आते हैं।

बरमान।

नर्मदा क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री पर राज्य सरकार ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा के रखा है। इसके बावजूद भी नर्मदा क्षेत्रों में अवैध शराब की जमकर बिक्री की जा रही है। एक ओर जिले में अभियान चलाए जा रहे हैं,महुआ की शराब पकड़ी जा रही है वहीं दूसरी ओर पवित्र नगरी में अवैध शराब की बिक्री की जा रही है जो अत्यंत निंदनीय है।आखिर कैसे पुलिस की नजरों से दूर अवैध शराब का काराेबार बदस्तूर जारी है!शराबी खुले आम जाम छलकाते हुए कहीं भी नजर आ सकते हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इससे अनजान बना हुआ है।रिक्शा चालक आसानी से शराब बिक्री की जानकारी लोगों को देते हैं। इसके बदले में वह दस या बीस रुपए में उनको अड्डे तक पहुंचा देते हैं। 

करेली ।

लोक सेवा केंद्र के पीछे टपरे नुमा झोपड़ी से भी गांजा बिक्री की सूचनाएं प्राप्त होती रही हैं।सूत्रों की माने तो इस स्थान पर अक्सर चिलमचियो का जमावड़ा अक्सर लगा रहता है।स्थानीय निवासियों से चर्चा करने पर ज्ञात हुआ कि महज 50 रुपए में गांजा बेच रहे हैं।नाम ना छापने की शर्त पर नजदीक क्षेत्र के दुकानदारों द्वारा बताया गया कि शहर के कई इलाकों में नाबालिगों को सिगरेट के साथ गांजा पीते हुए देखा जा सकता है जो कि अत्यंत ही दुखद है।कुछ चिलामचियो से जब हमने बात करने की कोशिश की तब यह सामने आया की नशे के शिकार लोगों के लिए गांजा सबसे सस्ता माध्यम है।हालाकी जब इसके नुकसान के बारे में वार्ता की गई तब अधिकांश नशेड़ी खीसे निपोरते हुए वार्ता बीच में छोड़कर निकल गए।

नरसिंहपुर।

विगत कई वर्षों से शहर में ही एक महिला द्वारा बड़े स्तर पर गांजा बिक्री का काम किया जा रहा हैं।प्रशासन द्वारा गांजा,अवैध शराब इत्यादि नशीले पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने के तमाम दावे खोखले साबित हो रहे हैं।

वहीं जिले में युवा नशे के चलन को अपना जीवन शैली मानकर अपनी जिंदगी को नशे के गर्त में ढकेल रहे है। जिसे रोकना महज अभियान के माध्यम से संभव नहीं है,प्रशासन द्वारा सख्त कार्यवाही किए जाने पर ही नशे के सौदागरों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

मगर यह सवाल आज तक अनसुलझा है की गांजा की यह खेप कहां से आती है कौन लता है तथा शहर में कहां कहां इसकी डिलीवरी किसे की जा रही है?

पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही कार्यवाही और सख्ती के बावजूद जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गांजे की खुलेआम बिक्री से जाहिर होता है कि नशे के कारोबारियों के हौसले किस कदर बढ़ गए हैं।

सूत्रों के अनुसार शहर के रेलवे स्टेशन क्षेत्र,रोंसरा,गुरुद्वारा एवम झिरना क्षेत्र में गांजा बेचने वाले लगातार सक्रिय हैं।वहीं ग्रामीण इलाकों की बात करे तो समनापुर ,मुंगवानी ,करेली,बरमान,बरहेटा,नयागांव,केरपानी,सुरवारी, ,उमरिया इत्यादि अन्य गांवो में भी पाउडर, गांजा और अवैध शराब बिक्री की चर्चाएं भी जोर पकड़ती रही हैं। 

एक ओर जहां मध्य प्रदेश शासन ने नर्मदा नदी की पवित्रता पर विचार करते हुए अनेक नियम बनाए किंतु वहीं दूसरी ओर पवित्र नगरी बरमान के बस स्टैंड क्षेत्र से लेकर नर्मदा के तट तक शराब की खाली बोतलें, डिस्पोजेबल ग्लास और गांजा पीने वालों को बैठक के दृश्य आम हैं।

लेडी डॉन,कोरी जैसे असामाजिक तत्व न केवल युवाओं को बल्कि स्कूली बच्चों को भी नशे की खाई में धकेलकर कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे हैं।

बीस रुपए और पचास रुपए में मिलने वाली जहर की पुड़िया का खेल लंबे अरसे से बदस्तूर जारी है।सूत्र बताते हैं की ड्रग माफिया की अंदरूनी पैठ के चलते नशे के कारोबारी शहरी और ग्रामीण रहवासी इलाकों में खुलेआम अपना कारोबार चला रहे हैं।

स्थिति बदतर होती जा रही है,नशे की गिरफ्त में पड़कर अनेक परिवार और जिंदगियां तबाह हो गई है।महिलाओं और बच्चों पर भी इसके दुष्परिणाम नजर आने लगे हैं।आधुनिकता के नाम पर पार्टियों में नशे का चलन ट्रेंड कहलाने लगा है।नशे की लत का शिकार सिर्फ अशिक्षित और मजदूर ही नही है बल्कि तनाव और अवसाद से बचने के लिए शिक्षित वर्ग भी नशे की ओर अग्रसर होता जा रहा है।


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