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।। विकास का तमाशा ।।

।। समीक्षा ।।

।। नरसिंहपुर ।।

जिले के शहरी क्षेत्र को छोड़ दें तो आप ग्रामीण पहाड़ी क्षेत्रों में विकास के दर्शन नहीं कर पाते हैं! आजादी के 76 साल बाद भी अनेक इलाकों में लोग बदतर हालात में जिंदगी गुजार रहे हैं।

भले ही आदिवासी समाज के विकास के दौर में काफी आगे बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

आदिवासियों को बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच की कमी का सामना करना पड़ रहा है।पठन- पाठन व स्वास्थ्य की व्यवस्था आम लोगों की पहुंच से बाहर है।आदिवासी समुदाय आज भी सरकार से आस लगाए बैठे हैं कि कभी तो इनके भी दिन बहुरेंगे और इनके इलाके का भी विकास होगा।

हर बार चुनाव के दौरान ग्राम विकास के दावें तो बहुत किए गए, लेकिन इस आदिवासी बाहुल्य गांव का विकास नहीं हो पाया है।जिस तरह से सरकार और जिला प्रशासन को संकल्प लेकर काम करना चाहिए. उसमें कमी देखने को मिल रही है।

आज़ादी के इतने सालों बाद भी सरकारी सुविधाएं लोगो तक ना पहुंचने का कारण- मंत्रियों, विधायकों और सरकारी विभागों की लापरवाही और मनमानी तो नहीं है?

हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए बड़ी राशि उपलब्ध है, लेकिन कई योजनाएं भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से त्रस्त हैं।इन पर जितना ध्यान दिया जाना चाहिए उतना ध्यान नहीं दिया गया नतीजतन आज भी इनमें कोई सुधार नहीं आया और आज भी उनकी स्थिति वैसी ही है जैसे पहले थी।

पहाड़ी आदिवासी क्षेत्रों में आज भी चिकित्सा सुविधा समय पर मिल पाना किसी चुनौती से कम नहीं है।आदिवासी पहले भी बदहाल थे आज भी उनकी स्थिति वैसी है। शिक्षा, स्वास्थ,रोजगार ना पहुंचा पाना इस बेपरवाह सिस्टम का नमूना है।

क्या आदिवासी समाज अपने जल, जंगल और ज़मीन, आत्मसम्मान, सामाजिक न्याय, समानता, अपने प्राचीन रीती रिवाज़ों, भाषा और संस्कृति की रक्षा की बात भी ना करे? 

जारी :

ऐसी ही तस्वीर सामने आई जिसने सरकारी सिस्टम और विकास के दावों की पोल खोल कर रख दी है


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