https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_nXYDircpji_NBp4Y2oyo8rhVeU-DuXusJaP3AW8


 


 


 


*इनके होने ना होने का कोई मतलब ही नहीं!*

*।। व्यंग्य ।।*

आजकल हर तरफ शोर है, महिला सशक्तिकरण का दौर है लेकिन शोर कागजों में है यह बात अलग है! अब आप शहरों की बात न करने लगिएगा। शहर तो शहर है, बस हमें तो यह शिकायत है की आपको गावों से क्यों बैर है?

अब आपके शहर में तो नर्स मेडम जाती है ना ड्यूटी, पुलिस वाली मेडम भी अपनी ड्यूटी जाती हैं और टीचर मेडम भी,फिर ये समझ नही आता की सरपंच मेडम ड्यूटी क्यों नहीं जाती हैं?

अब भाई कोई दूध पीते बच्चे तो हो नहीं,की अब यह भी बतलाना पड़े की,भले ही आप जन प्रतिनिधि हो,लेकिन आपको अपने दायित्व निभाना चाहिए और भैया हमसे तो नही बोली जाती ये सब बातें! पता नहीं जनता ये सब बातें कैसे बोल लेती है?

अब पंचायत में पिता बैठे,पति बैठे, सास बैठे, जीजा, दामाद, ससुर, देवर कोई भी बैठे अब तुम्हे क्या?पहले नही सोचा था!पत्नी है पति है ,,कैसे मना करेगी बेचारी भला अपने पति को?और तुमने यह सोच भी कैसे लिया है!

तुम्हारी इतनी हिम्मत! जानते नही हम उस देश के वासी हैं जहां पत्नी अपने पति का नाम भी लेने में शर्माती है,सकुचाती है,घबराती है और तुम उम्मीद करते हो की,  वह नारी ऊंची आवाज में कह सकेगी,की आप कानून का उल्लंघन कर रहे हैं,आप नियम तोड़ रहे हैं, आप पर कार्यवाही हो सकती है?नही बोल सकती,यही तो हम भी कह रहे हैं!

अब लोगों का क्या है, लोग तो यह भी कहते हैं कि, इनके होने ना होने का मतलब ही क्या है? अब कोई तो मतलब होगा ही ,जब तक वह मतलब किसी की समझ में नहीं आता,तब तक किसी ना किसी का मतलब भी निकलता ही रहेगा।अब यह मत कहने लगना की हम सरपंच पति की बात कर रहे हैं।

वैसे मैंने सुना है,आप लोग काफी समझदार है और समझदार को इशारा काफी होता है,इतने समझाने के बाद भी नासमझी की बात भला कौन कर सकता है?

हम तो यह भी समझते हैं कि,,,कुर्सी को मैनेज भी करना पड़ता है,अधिकारियों,ठेकेदारों को कमीशन देना पड़ता है,मीडिया में विज्ञापन का खर्च उठाना पड़ता है,कितने सारे एक्स्ट्रा खर्च हैं,अब कमाई भी एक्स्ट्रा तो होना ही चाहिए ना?मंहगाई का जमाना है अब आटे में नमक बराबर से कोई काम नहीं चलता है, अब तो सीधा नमक में आटा मिलाना पड़ता है,बस इतना की जांच में मिल जाए की नमक में आटा था,ज्यादा की जरूरत भी क्या है?

अब एक दिन तो एक सज्जन पीछे ही पड़ गए,,कहने लगे आप पत्रकार हैं,लेखक हैं,आपके अनेक पेशेवर साथियों से संपर्क भी होंगे,तो कुछ ऐसा करें की सब मैनेज हो जाए।आपका भी भला हो जाएगा। हमारे भी बाल बच्चे हैं।कहने लगे की अधिकारियों को तो हमने मैनेज कर लिया है लेकिन खबरें चलती है तो अच्छा महसूस नहीं होता, रिश्तेदार मजे लेते हैं तो गांव वाले भी सवाल करते हैं,,अगर आप को ऑपरेट करेंगे तो सबके साथ सबका विकास हो जायेगा,मैने माथा ठोकते हुए सोचा की ,विकास का तो पता नहीं लेकिन सरकार की मंशा का जरूर सत्यानाश हो जायेगा।

जारी :








أحدث أقدم

📻 पॉडकास्ट सुनने के लिए यहां क्लिक करें।

🎙️ Stringer24News Podcast

🔴 देखिए आज का ताज़ा पॉडकास्ट सीधे Stringer24News पर