सांकेतिक चित्र।
ग्राम पंचायत बसेड़ी।
बसेड़ी गांव की हालिया स्थिति का यदि जायजा लें तो गांव की धरातलीय स्थिति खुद ब खुद गांव और ग्रामीणों के विकास को बयां कर देती है।।
ऑन कॉल इंटरव्यू के दौरान सरपंच ने स्वयं यह स्वीकार किया था, कि वे ग्राम पंचायत कार्यालय प्रतिदिन नही जाती है।वहीं भ्रष्टाचार के सवाल पर नाराजगी जताते हुए,सरपंच ने ग्रामीणों को अभद्र संबोधन करते हुए कहा था कि,गांव वाले तो कुछ भी भौंकते है।क्या सरपंच यहां ग्रामीणों को कुत्ते की उपमा दे रही है?यह कैसी मानसिकता है?जिस ग्राम प्रधान की ऐसी सोच हो,, भला वह गांव के विकास में कैसे रुचि ले सकता है?
इतना ही नहीं कथित तौर पर प्रधानमंत्री आवास योजना हितग्राहियों से पैसे वसूली की बात भी सामने आई है।आरोप है कि ग्राम रोजगार सहायक और सचिव ने पंचायत के विगत वर्षीय कार्यकाल में जमकर मलाई डकारी है।
सूत्रों की माने तो जीआरएस और सचिव ग्राम पंचायत कार्यालय नियमित नही पहुंचते हैं।घर से ही चलाया जा रहा है कार्यालय?
जारी :
आखिर कौन चला रहा है पंचायत?
