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।। विवेचना ।।

*शिकायतों पर क्यों नहीं होती सुनवाई?*

वर्तमान में यह देखने में आ रहा है कि,सीएम हेल्प लाइन पर दर्ज शिकायतो को गंभीरता नहीं लिया जा रहा है। आज भी ऐसी अनेकों शिकायत दर्ज है जिन्हे दो से तीन माह बीत गए हैं, लेकिन समस्या का निराकरण नहीं किया गया।

कलेक्टर द्वारा समय समय पर शिकायत का निराकरण करने के लिए कहा जाता है, लेकिन अधिकारियों द्वारा कलेक्टर के आदेश को तवज्जो नहीं दी जाती है बल्की मनमाने तरीके से कार्य किया जाता है!

तानाशाह बने विभागीय अधिकारी शिकायतकर्ता की शिकायत का निराकरण करने की बजाय उसे बहला-फुसला या धमकाकर जबरन शिकायत को बंद कराने की कोशिश करते हैं!बिना निराकरण किये शिकायत को बंद कराने छल, बल, दाम दंड, भेद का दबाव बना शिकायत को बंद कराने का प्रयास किए जाते हैं।

कथित तौर पर यह भी सामने आया कि,शिकायत का बिना निराकरण किये जबर्दस्ती कटाने का नाजायज दबाव विभाग के आलाधिकारियों द्वारा बनाया जाता है।

आम आदमी की न्याय की आस भी धुंधली पढ़ने लगी है।

अनेकों बार जांच के नाम पर प्रशासन द्वारा भ्रष्टाचार की जांच के लिए अधिकारियों की टीमें गठित कर दीं लेकिन कई बार कार्रवाई तो दूर जांच तक नहीं हुई।

इतना ही नहीं ग्राम पंचायतों की राशि में किए गए फर्जीबाड़े के कई मामलों की जांच छह माह में एक वर्ष से भी ज्यादा समय से लंबित पड़ी हैं जो पूरी नहीं हो पा रहीं हैं।

हालाकी पिछली खबरों को उठाकर देखें तो पाते हैं की गवन के मामलों में दर्जन भर कर्मचारी निलंबित किए जा चुके हैं तथा इतने ही प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है,लेकिन इसके बावजूद भी भ्रष्टाचार करने वाले सरपंच सचिव और अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं।

जारी :










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