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सांकेतिक चित्र।

*बहन को प्रधानमंत्री आवास :61 वर्ष की मां को बना दिया मनरेगा मजदूर:ग्राम रोजगार सहायक ने खेला भ्रष्टाचार का खेल?: ग्राम पंचायत पलेरा:चिचली:नरसिंहपुर।*

।। विवेचना ।।



मनरेगा योजना ज़मीन पर कितनी कारगर है, इसे समझने के लिए हमने पिछले एक महीने में मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में इसका गहन जायजा लिया।

तब हमने पाया की भ्रष्ट कार्यों में सहयोग करने वालों के नाम फर्जी हाजरी भरकर उन्हें उपकृत किया जाता है? भले ही वे काम पर ना जाए!नरसिंहपुर जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में घोटालेबाजी की जड़ें इतनी मजबूत हो गई हैं कि किसी भी ग्रामीण में इतनी हिम्मत नहीं कि वह इसका विरोध कर सके।

जब ग्राम पंचायत में बैठे जिम्मेदार शासन की महत्त्वाकांक्षी योजना का उपहास बना दे और वरिष्ठ अधिकारी कार्रवाई भी न करे तो आश्चर्य होना लाजमी है।मनरेगा कार्यों में अनियमितता कर मजदूरी व सामग्री राशि में गबन किया गया है।

अब देखना यह है कि ग्राम पंचायत पलेरा की भोली भाली जनता यूँ ही घोटालेबाजों की चक्की में पिसती रहेगी या फिर अधिकारी मनरेगा के वास्तविक उद्देश्य को जमीन पर उतारेंगे।यहाँ कई ऐसे कारनामे रचे गए है जिसकी अगर सूक्ष्म जांच कराई जाए तो प्याज के छिलके की तरह परत दर परत खुल कर सामने आएगा।

मस्टर रोल में मजदूरी भरने का जितना अधिकार ग्राम रोजगार सहायक का होता है, उससे कही ज्यादा अधिकार सरपंच और सचिव का है तो क्या सरपंच और सचिव पर कार्रवाई नहीं होना चाहिए?

ग्रामीणों के मुताबिक गहन जांच कर सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक को आरोपी बनाते हुए धोखाधड़ी की धारा में प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।मामले से सही जांच हुई तो रोजगार सहायक संबंधित पंचायत सचिव समेत मनरेगा के सब इंजीनियर का नपना तय माना जा रहा है।

जारी :

स्थिति को और अच्छे से समझने के लिए हमने जिले की एक और पंचायत के एक मजदूर से बात की लेकिन बातचीत करने के तुरंत बाद उन्हें धमकियां मिलने लगीं, तो वह डर गए और अपना वीडियो डालने से मना करने लगे।








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