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*पति-पत्नी के आपस का मामला है! : घरेलू हिंसा का ख़ौफ़नाक चेहरा।*

गोपनीयता नीति नियमों के तहत स्थान और पात्र के नाम परिवर्तित किए गए हैं।

।। आपबिती ।।

कामकाजी महिलाओं के लिए कभी कभी जीवन बहुत ही बोझिल होता है।पति की शक करने की आदत के चलते परिवार नर्क बन जाता है।

शक की बुनियाद पर बारबार पूछे जाने वाले ये सवाल जैसे, कहां गई थीं,किससे बात कर रही थी, किसका फोन आया था,क्या बोल रहा था, दरवाजे पर क्यूं खड़ी हो जैसे सवाल एक औरत के लिए जंजीर की तरह होते हैं।

कामकाजी महिलाओं के लिए तो स्थितियां और भी पेचीदा हो जाती है।आए दिन की कलह और बाद विवाद के बीच परिवार की खुशियां स्वाहा हो जाती है।

शक की इस आदत के कारण ना जाने कितनी ही महिलाओं को अपनों ही के हाथों अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। अनेकों परिवार शक की इस आदत के कारण उजड़ गए और ना जाने कितने ही बर्बादी की कगार पर है।

रितु 38 वर्ष (ग्रहणी)का कहना है कि, मैं मानती हूं कभी कभी अत्यधिक परवाह और प्रेम को भी आप शक समझने की भूल कर बैठते हैं लेकिन जब पति आक्रोषित होकर अपशब्दों का उपयोग कर रहा हो और हाथापाई पर उतारू हो तब आप स्थिति की गंभीरता को अनदेखा नहीं कर सकते हैं।दरअसल "यह पति पत्नी का आपस का मामला है" धारणा के चलते उन्हें मदद मिलने की उम्मीद भी अक्सर ना के बराबर ही होती है।ऐसे में एक औरत की जिंदगी दांव पर लग जाती है। शक में पत्नी को पीटने, घर से निकाल देने और हत्या कर देने की खबरों से अखबार की अनेकों खबरें लहुलुहान है। आज रितु अकेली रहती हैं,अपनी जिंदगी में खुश हैं,हालाकि अब वे अपने पिछले जीवन को याद करना नही चाहती है।

निशिता 29 वर्ष (अकाउंटेंट) कहती हैं कि,शादी के कुछ समय बाद तक तो सब ठीक लग रहा था लेकिन धीरे धीरे मेरे पति मुझ पर बात बात पर शक करने लगे। बेवजह के गंदे इल्जाम और मारपीट की हैवानियत से मैं तंग आ गई थी। रोज रात को शराब पीकर किसी ना किसी बात को बहाना बनाकर मुझसे मारपीट की जाने लगी।तब थक हारकर मैने अपने परिवार वालो की मदद ली।

मोहनी 41 वर्ष (बूटीक संचालक) अपनी आपबीती सुनाते हुए रुआंसी हो जाती है।उनके चेहरे पर उदासी साफ दिखाई देती है। मोहनी बताती हैं कि, बूटिक चलाने से पहले मैं govt. Job में थी।शादी के चार साल तो अच्छे से गुजरे लेकिन फिर पति ने मेरे ऑफिस के सहयोगियों पर शक करना शुरू कर दिया।फिर शुरू हुआ तकलीफों का एक लंबा सिलसिला। रात को नशे पति मुझसे किसी जानवर सा बरताव करने लगे थे।गुस्से में अक्सर सिगरेट से मेरे हाथ पर दाग दिया जाता था। एक रात तो हद ही हो गई, उस रात मेरे पति कुछ ज्यादा ही पीकर आए थे। मैं डरी हुई थी और फिर वही हुआ जो रोज होता है लेकिन उस रात पति ने मुझे मारने की नियत से मुझपर हमला किया।मैंने जैसे तैसे घर से भागकर अपनी जान बचाई और मेरे भाई को फोन लगाया। अब मेरा तलाक हो गया है लेकिन अब भी दिमाग से वो डरावनी यादें नही निकली हैं।

जारी :  

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