*और कितना दर्द सहना है?* *इस जीवन से तो मौत भली?*
नरसिंहपुर।
बिमारी में तड़पता बेजुबान गौ वंश चिलचिलाती धूप में खून रिसते जख्मों का दर्द किस तरह सहता होगा, और प्रशासन इन मूक जीवों के लिए क्या कर रहा है , यह सवाल बेहद अहम है।
बीमारी ग्रस्त पशु को अन्य पशुओं से अलग रखना चाहिए और ऐसे पशु का आवागमन प्रतिबंधित किया जाना चाहिए ताकि अन्य पशु संक्रमित न हो सकें लेकिन शहर की सड़कों पर दर्द से तड़पते पशु देखकर तो यह लगता है की प्रशासन की आंख कान सब बंद हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लंपी स्किन बीमारी एक वायरल रोग है। जिसमें गाय भैंस या बैल के शरीर पर गठाने होने लगती है, आमतौर पर ये गांठें मुख्य रुप से इन पशुओं के जननांगों, सिर, और गर्दन पर होती है,उसके बाद पूरे शरीर में फैल जाती है। धीरे धीरे ये गांठें बड़ी होने लगती है और समय के साथ ये गांठ घाव का रुप ले लेती है। जिससे पशु को गर्भपात और मौत तक हो जाती है।
प्रशासन को इस बीमारी को चेतावनी के तौर पर लेते हुए तत्काल उचित कदम उठाए जाने चाहिए। क्यों की अगर ये बीमारी तेजी से पांव पसारती है,तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति होगी।
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