आयुष मंत्रालय आयुष आधारित आहार और जीवन शैली को बढ़ावा दे रहा है और "सुपोषित भारत" (पोषित भारत) के अंतिम लक्ष्य को साकार करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है।
आयुष मंत्रालय ने आयुष प्रथाओं और सिद्धांतों के साथ बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में पोषण संबंधी परिणामों में सुधार के लिए "कुपोषन मुक्त भारत के लिए आयुष आहार सलाहकार" के रूप में एक समग्र पोषण दिशानिर्देश शुरू किया है।
आयुष मंत्रालय ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की अनुसूची II के तहत निर्धारित पोषण मानकों के संशोधन में खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग को भी इनपुट प्रदान किए हैं।
आयुष मंत्रालय दवा की आयुष प्रणालियों के समग्र प्रचार और विकास के लिए राज्य / केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के माध्यम से राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) की केंद्र प्रायोजित योजना लागू कर रहा है।
NAM के तहत, आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों (HWCs) के संचालन सहित विभिन्न गतिविधियों के लिए राज्य / केंद्रशासित प्रदेश सरकारों को वित्तीय सहायता का प्रावधान है। आयुष एचडब्ल्यूसी में, आयुष प्रणाली के सिद्धांतों और प्रथाओं पर आधारित एक समग्र कल्याण मॉडल की स्थापना की जा रही है, जिसमें जीवनशैली में आयुष को बढ़ावा देने सहित निवारक, प्रोत्साहन, उपचारात्मक, पुनर्वास स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
इसके अलावा, NAM के आयुर्वेद घटक के तहत, स्कूली बच्चों के लिए आयुष प्रणाली से आहार सिद्धांतों को शामिल करते हुए स्वस्थ जीवन शैली और एकीकृत आहार शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रावधान है। इसके अलावा, NAM के आयुष ग्राम घटक के तहत, आयुष आधारित जीवन शैली को व्यवहार परिवर्तन संचार, स्थानीय औषधीय जड़ी-बूटियों की पहचान और उपयोग के लिए ग्राम स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के प्रावधान के माध्यम से बढ़ावा दिया जाता है।
यह जानकारी आयुष मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
