ग्राम पंचायत।
पंचायत के कार्यों में लापरवाही व मनमानी आज आम बात हो गई है।ऐसा लगता है जैसे आंतरिक तौर पर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को मौन सहमति प्राप्त हो चुकी है।
इसके बावजूद भी जिम्मेदार कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।सूत्र बताते हैं कि अंदरूनी स्तर पर ही मामलो को रफादफा कर दिया जाता है।
ग्राम सभाओं का आयोजन नियमित नहीं किया जा रहा है।शासकीय योजनाओं के बहुत से कार्य अब भी पूर्ण होने की बाट जोह रहे हैं।
कई लाख रुपये का भुगतान फर्जी बिल और हाजरी के माध्यम से किया जाना आश्चर्य चकित नही करता है?
सरपंच और सचिव की मनमानी व मिलीभगत कर परिजनों को फायदा पहुंचाने का खेल भी बदस्तूर जारी रहा!
विस्तृत विश्लेषण के बाद आए नतीजे चौंकाते हैं,भ्रष्टाचार की फेहरिस्त में सबसे ज्यादा पंचायत सचिव के शामिल होने की पुष्टि आए दिन की खबरों पर गौर कर भी की जा सकती है।
आज हालत यह है की सचिव और जीआरएस मंहगी गाड़ियों के मालिक हैं,जिनमें जेसीबी और डंपर सहित क्रेसर, मिक्चर मशीन, ट्रैक्टर स्कार्पियों जैसे कई वाहन शामिल हैं।चन्द दिनों में आखिर कैसे सचिव और जीआरएस अकूत संपदा के स्वामी हो गए?
फर्म के फर्जी बिल से खरीदी और फर्जी जॉब कार्ड का खेल खेलने में माहिर सचिव और जीआरएस द्वारा निजी स्वार्थों की पूर्ति हेतु तमाम नियमों और कायदों को दरकिनार कर दिया गया!
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक सचिव और जीआरएस द्वारा परिजन के बैंक खातों में भी रुपए जमा किए गए!
सचिव और जीआरएस आखिर किस तरह बेखौफ होकर सरकारी राशि की बंदरबांट करने में लगे हैं, उसका यह एक बेहतरीन उदाहरण है।
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20-3-2022@4:00pm