नरसिंहपुर जिले के शहरी क्षेत्र की सीमा एवम ग्रामीण अंचलों में आसपास के इलाकों में खेतों में,नदियों किनारे ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है।
भट्ठों के लिए आसपास के क्षेत्रों में पेड़ों का जमकर कत्ल ए आम किया जा रहा है।
हाल ही की बात करें तो यह नजारा बेलखेड़ी शेड़ के पुल के समीप का है जहां सड़क किनारे ही ईंट बनाई जा रही है। इस दौरान भारी मात्रा में पेड़ों को काट कर खुले आम रखा गया है। ताकि लकड़ी सूख जाए और उसे भट्ठे में उपयोग किया जा सके।
नदी तट के नजदीक ही सड़क से लगे भट्ठे पर मिट्टी खनन करीब 5 से 10 फिट तक किया गया है।
सरकार गला फाड़ कर चिल्ला रही है वृक्ष बचाओ , जीवन बचाओ लेकिन एसी रूम में बैठने वाले विभागीय जिम्मेदार कागज पर ही कलम चला रहे हैं!जमीनी स्तर पर क्या हालात हैं, कभी इस बारे में जानने की चेष्टा भी शायद ही की जाती हो?
दबी जुबान में स्थानीय निवासी बताते हैं की ईंट भट्ठे वालों की सेटिंग ऊपर तक होती है।यहां तक कि पटवारी और पंचायत की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता है!
ऐसे हालात में यह सवाल उठना लाजमी है कि, आखिर किसके संरक्षण के चलते हरे भरे व्रक्षो का कत्ल करने वाले अधिकारियों की नजर से बचे हुए हैं?
खुलेआम हरे व्रक्षों कटकर भट्ठों में खपाया जा रहा है।स्थल के मौजूदा हालात और वहां की तस्वीरें इस के प्रत्यक्ष साक्ष्य हैं।मौजूद स्थल पर खड़े ठूंठ कटाई की दास्तान भी स्वतः बयां कर रहे हैं।
विश्वसनीय सूत्रों की माने तो आंतरिक तौर पर वन माफिया अपने पैर पसार रहा है।राजस्व और वन विभाग की अनदेखी के चलते तमाम नियम और कायदों को दरकिनार करते हुए अनैतिक और अवैध तरीकों से लाभ प्राप्त किया जा रहा है।
क्या प्रशासन कोई कार्यवाही करेगा या फिर भट्टों पर लकड़ियों के लिए इसी प्रकार वृक्षों का कत्ल ए आम जारी रहेगा?



