ग्राम पंचायत बसुरिया।
गोकुल ग्राम और निर्मल ग्राम की उपाधि से सुशोभित ग्राम पंचायत बसुरिया की स्थिति दर्शाती है कि अनदेखी और उपेक्षा के चलते किस तरह गांव में अराजकता और अव्यवस्था पैर पसार रही है ।
गांव में पसरी गंदगी और नालियों के दूषित पानी के सड़क पर प्रवाहित होने से गांवों में संक्रामक बीमारी के फैलने का खतरा बना हुआ है। इसके बाद भी पंचायत द्वारा तनिक भी गांवों को साफ सुथरा बनाने की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
आश्चर्य की बात है की अधिकारियों को निर्मल गांव में किसी प्रकार की अव्यवस्था नजर नहीं आ रही है।
गांव की गलियों में गंदा पानी फैला है।हमेशा गंदा पानी भरे रहने से लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है।स्कूल आने जाने वाले बच्चे भी दूषित वातावरण के आस पास पढ़ने के लिए मजबूर हैं।
विकास की बात को लेकर स्ट्रिंगर 24 न्यूज ने ग्रामीणों से बात की तब एक ग्रामीण ने बताया कि नालियों में गंदगी और बदबू के कारण घर में रहना और खाना पीना मुश्किल है।
वहीं एक ग्रामीण ने बताया कि पिछले पांच छः माह से गांव दुर्दशा का शिकार है।
एक अन्य ग्रामीण ने बीच में बात काटते हुए कहा की पांच माह पूर्व भी नालियां साफ करने का सिर्फ दिखावा किया गया था।
ग्रामीण संदेह जाहिर करते हुए दबी जुबान में आरोप लगाते हैं कि सरपंच, सचिव और जीआरएस मिलकर साफ सफाई के नाम पर गोलमाल कर सकते हैं।जांच किए जाने पर ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा।
नाम ना छापने की शर्त पर एक ग्रामीण ने कहा की बसुरिया में सरपंच और सचिव की तानाशाही के चलते मूलभूत समस्याओं के लिए भी लोग परेशान रहते हैं लेकिन गरीब की कोई सुनवाई नहीं होती है।
बहुत से लोग मानते हैं कि गांव की इस हालत के लिए सरपंच और सचिव ज़िम्मेदार हैं।मच्छरों की भरमार हो गई है,नालियों में इतना कचरा भरा है कि पानी की निकासी नहीं हो पाती है, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?
लाखों रुपये का बजट गांव के विकास के लिए आने के बाद भी ग्राम पंचायत जिम्मेदारी पूर्ण करने में रुचि नहीं दिखा रही है?