गाडरवारा।
विगत कुछ दिनो से गाडरवारा एवम जिले के अन्य क्षेत्रों में मूर्ति के जल और दूध पीने की घटनाओं से सोशल मीडिया और खबरों के बाजार गुलजार हैं।
मंदिरों में भीड़ उमड़ रही है महिलाएं बच्चे बुजुर्ग सभी अपने घरों से कटोरी लोटे में दूध और जल लेकर मंदिरों में नंदी को पिलाने के लिए उमड़ रहे हैं।भगवान को पानी पिलाने के बाद भक्त जयकारा भी लगा रहे हैं।
हालाकी सौ प्रतिशत साक्षर जिले में ऐसी घटना पहली बार नहीं हो रही है।नंदी के दूध और जल पीने की अफवाह कुछ ही देर में काफी दूर तक फैल गई।
मूर्ति का दूध-पानी पीना संभव नहीं है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है।यहां बाइनरी थ्योरम का सिद्धांत लागू होता है।
इस विषय पर जब हमने विशेषज्ञों की राय जाननी चाही तब सामने आया कि द्रवों की गति, पृष्ठ तनाव, होता है। आसंजन और संबंद्धता जैसे भौतिक गुणों के कारण ऐसा प्रतीत होता है
पृष्ठ तनाव द्रव का वह गुण है जिसमे वह अपने क्षेत्रफल को कम से कम बनाये रखने का प्रयास करता है। द्रवों के अंतरआणविक बल से उत्पन्न इस तनाव के कारण द्रव की उपरी परत किसी इलास्टिक शीट की तरह व्यवहार करती है।
जानकारों के अनुसार कोई भी प्रतिमा दूध नहीं पीती है। बल्कि द्रव्यों की गति, पृष्ठ तनाव, आसंजन और संबंद्धता जैसे भौतिक गुणों के कारण ऐसा प्रतीत होता है।