ग्राम बसुरिया।
ग्राम बसुरिया,लवासर,रहमा,पलेरा के ग्रामीण आज भी नरकीय जीवन जीने के लिए मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है की,क्या अधिकारियों को पेश किए जा रहे नजराने और शुकराने के लिफाफे?
हालांकि सभी एक से हों ऐसा भी नहीं है, कुछ अधिकारी अभी भी अपवाद के रूप में कार्य कर रहे हैं जिनको अपनी ईमानदारी पर नाज है।
वैसे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि नजराने में वो दम होता है कि सब जायज मानकर खुली छूट दे दी जाती है।
यह नजराने की ही खासियत है सांप को रस्सी और रस्सी को सांप बना दिया जाता है।
विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाईयो को पर्दो के पीछे अंजाम दिया जाना कहां तक उचित है? ग्रामीणों द्वारा अधिकारियों की कार्यशैली पर लगातार अंगुली उठाई जा रही है।
क्या वजह है कि, राशन की जांच पर अब पर्दा पड़ गया है?आखिर किसे बचाने के लिए साक्ष्यों को दरकिनार कर जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई?
ग्रामीणों द्वारा लगातार कभी संबंधित विभाग, कभी जनसुनवाई तो कभी सीएम हेल्प लाईन में शिकायत की गई किंतु नतीजे शून्य नज़र आए।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों के द्वारा मनमानी से कार्य किया जा रहा है।
ग्रामीण गुहार लगाते रहे कि चरनोई भूमि पर अतिक्रमण कर फसल ली जा रही है।जगह की जांच कर अतिक्रमण हटाया जाए।
हालाकी विभाग द्वारा खानापूर्ति अवश्य की गई किंतु वह संतोष जनक नही कही जा सकती है।
सड़क को बनाने की मांग भी गांव वाले कर चुके हैं।इतना ही नही ग्रामीणों को धरने और आंदोलन का सहारा भी लेना पड़ रहा है,लेकिन जिम्मेदार अब तक कुंभकर्णी निद्रा से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
क्या वजह है की, ग्रामीणों की शिकायत पर ना सरपंच ध्यान देते हैं ना वहां के सचिव।