राष्ट्रवाद के वेष में पेश किये जा रहे सांप्रदायिकरण के मुद्दे पर हालाकि चुप्पी साध ली जाती है।वैसे मतदाताओं के तौर पर हिंदू-मुस्लिम पर सभी राजनीतिक दलों का एकाधिकार है।कायरता, हिंसा और क़त्ल से कभी विकास की गाथाएं नहीं लिखी जा सकती हैं।
कभी हिजाब पर सियासत तो कभी फिल्म को लेकर पैदा होते मतभेद महज सियासी चालों से ज्यादा और कुछ नहीं है।
आंखों पर चढ़ी धर्मांन्धता की पट्टी को हटाकर मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने हेतु किए जाने वाले प्रयास विकास की एक नई इबारत लिख सकते हैं।
हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने पर जोर दिया जाना चाहिए।विशेष रवैये के साथ ख़बरें प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए।
आम आदमी को यह समझना होगा कि सियासी चालें हमें बाँट रही है।धर्म के नाम पर वोट इकट्ठे करने वाली एक जुटता का विश्लेषण किया जाना चाहिए।क्या इंसानियत का बंटवारा होना चाहिए?
धार्मिक मुद्दों से किस सियासी दल को कितना फायदा होगा यह आम जनता को मंथन करना ही चाहिए।
धर्म खतरे में है कहकर न जाने अब तक कितने युद्ध लड़े गए?धर्म के नाम पर लड़कियों से बलात्कार किए गए,महिलाओं को बेवा कर दिया गया,बच्चे अनाथ हो गए,घरों को फूंक दिया गया और किसलिए सिर्फ धर्म और मजहब के नाम पर।क्या धर्म और मजहब के नाम पर भीड़ किसी भी लड़की की अस्मत पर हाथ डाल सकती है?
दूध मुंहे बच्चों को मौत के मुंह में फेक दिया जाता है, छः माह की बच्चियों से बलात्कार किया जाता है,घर दुकान जला कर भीड़ कहती है कि, हम धर्म बचाने निकले हैं!
सियासी खेमों ने धर्म के नाम पर जितना इन्सान को लड़वाया उतना और किसी ने नहीं लड़वाया।लोगों के मस्तिष्क खोखले हो गए हैं।पशु से मनुष्य बने इंसान के अंदर अब भी पाश्विकता की झलक दिखाई देती है।
भीड़ का कोई धर्म और ईमान नही होता।हालाकी दो खेमों में बटी हुई भीड़ में कोई एक फलां धर्म का ठेकेदार है तो दूसरा फलां धर्म का।लेकिन इन सबके बीच कोई खो जाता है, तो वह है इंसानियत।
धार्मिक भावनाओं के नाम पर राजकीय पक्षों द्वारा राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए इंसान का बेजा राजनीतिक इस्तेमाल किया गया।
क्या सरकार का गुणगान करते रहना है,या सवाल भी करना है?आज यह सबसे बड़ा सवाल है!क्या सवाल करना अब बंद कर दिया जाए?क्यों की तमाम आंकड़े विकास की गाथा गा रहे हैं!और शायद इसलिए भी की कहीं आपके ऊपर देशद्रोही का तमगा ना लगा दिया जाए।
समर्थक और विरोधी दोनो की तरफ से अक्सर कमेंट आते हैं की मैं नकरात्मकता दिखाता हूं जिसे बंद कर दिया जाना चाहिए, चूंकि सरकार ने तमाम योजनाएं चलाई हैं,इसलिए अब कोई और सवाल नही उठना चाहिए।