नरसिंहपुर।
कानून की मौजूदगी के बावजूद खाद्य सामग्रियों में मिलावट का खेल बदस्तूर जारी है।
सूत्रों का कहना है कि मसालें,दूध उत्पाद,पनीर मावा इत्यादि में मिलावट का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
मिलावट खोरी के जरिए अधिक मुनाफा कमाने का यह रोग शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक फैल गया है।
मिलावटखोर अदृश्य हत्यारे की भांति घात लगाए बैठे हैं।सूत्रों की माने तो मिलावटी सामान की फेहरिस्त में अधिकांश मामले में मसाले, घी और दूध सबसे ऊपर है।
गुप्त सूत्रों के अनुसार गाय भैंस के दूध के नाम पर पाउडर वाले दूध की बिक्री शहर में खुलेआम फेरी लगाकर की जा रही है।इतना ही नहीं शहर में मिलने वाला दही और छाछ भी मिलावट खोरी से अछूता नहीं है।
शहर के दुकानदारों का यह दावा है कि निश्चित समय के पश्चात दूषित खाद्य सामग्री,मिठाई इत्यादि नष्ट करवा दी जाती है,किंतु हकीकत कुछ और ही है!
गर्मी का सीजन शुरू हो गया है।बाजार में तरह तरह की ठंडाई के स्टाल और ठेले सजने लगे हैं।आइसक्रीम, कुल्फी, बर्फ के गोले, जूस, गन्ने का रस में भी मिलावट के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।यह मिलावट बच्चों के लिए खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकती है। आइसक्रीम,बर्फ के गोले और जूस में मिला रंग और सेक्रीन सेहत पर गंभीर असर डालता है।गंदे पानी से बर्फ निर्माण और रख रखाव में लापरवाही जैसी बातें आम हो गई है।
साइकिल ,ठेला एवं अन्य साधनों से फेरी लगाकर शीतल पेय,आइसक्रीम,इत्यादि बेचने वालों द्वारा भी मिलावटी सामग्री बच्चों तक पहुंचाई जाती है।
विक्रेता खाद्य पदार्थों के सारे मापदंड को दरकिनार कर बेखौफ होकर न सिर्फ नियम तोड़ रहे हैं बल्कि चन्द सिक्कों के लालच में इंसानियत की हत्या कर रहे हैं।
निम्न गुणवत्ता युक्त सामग्री का इस्तेमाल कर कम दाम में अधिक मुनाफे का खेल नया नहीं है।
मिठाई और फास्ट फूड के नाम पर किस तरह शहर में दूषित और मिलावटी सामग्री बेचने का खेल चल रहा है,जब इसकी पड़ताल की गई तो सामने आया कि जितना सोचा जा सकता है, उससे भी कहीं अधिक पैमाने पर मिलावट के जहर का कारोबार स्थानीय रहवासियों की जान दांव पर लगाकर किया जा रहा है!
कैसे परोसा जा रहा है धीमा जहर ?
- विशेष रिपोर्ट - थाली में जहर।
14-3-2022@4:00pm