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ग्राम पंचायत खुरपा।

ग्राम कोटवार मातवर सिंह द्वारा नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई गई की उन्हे ग्राम प्रधान मधु धौरेलिया से जान का खतरा है,क्यों की ग्राम प्रधान द्वारा लगातार धमकियां दी जा रही हैं।

ग्राम कोटवार के अनुसार विगत कुछ समय पूर्व ग्राम प्रधान मधु धौरेलिया द्वारा ग्राम कोटवार मातवर को सार्वजनिक रूप से जाति सूचक अपमान किया गया।

जिसकी एफआईआर ग्राम कोटवार द्वारा दर्ज कराई गई।यहां गौर करने वाली बात यह है की,तमाम तरह की धाराएं लगाने के बाद भी कोई ठोस कार्यवाही नही की गई।जिसकी शिकायत ग्राम कोटवार द्वारा की गई।

उक्त घटना के बाद यह सवाल उठना लाजमी है कि, क्या कानून सिर्फ गरीबों के लिए है?यदि ग्राम प्रधान के स्थान पर ग्राम कोटवार होता तब भी क्या इसी तरह कार्यवाही की जाती?जवाब शायद "नहीं" हो सकता है!

इसी बात से खिन्न होकर राजीनामा करने का दबाव बनाने के लिए ग्राम प्रधान द्वारा धमकियां दी जा रही है जिसकी वजह से ग्राम कोटवार को मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजरना पड़ रहा है।ग्राम कोटवार के अनुसार डर और दहशत के बीच वे एक बार घटना क्रम के दौरान ही हार्ट अटेक का शिकार हुए।

वहीं जब हमारे द्वारा ग्राम प्रधान मधु धौरेलिया से संपर्क करने की कोशिश की गई किंतु समाचार लिखे जाने तक ग्राम प्रधान से संपर्क नही हो पाया है।

स्ट्रिंगर 24 न्यूज द्वारा विगत दो माह से ग्राम खुरपा के विभिन्न घटना कर्मों का विश्लेषण किया जा रहा है एवम विश्लेषण से प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि -

विवाद की जड़ गहरी है,यह महज आपसी खुन्नस या रंजिश नही बल्कि कहीं न कही सियासत के खेल की तरफ इशारा करती है!

वर्चस्व की इस लड़ाई में ग्राम कोटवार या अन्य पंचायत कर्मी केवल सियासी शतरंज के मोहरे हैं!

सियासी आंतरिक कलह जो रंग दिखा रही है, वह ग्रामीणों के लिए सर दर्द साबित हो रही है।

आपसी खींचतान और सियासी कलह के बीच कुछ घटोलों और धांधली की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही है।

सियासत के तमाशे में आरोप प्रत्यारोप के आगे जब षडयत्रों के जाल देखता हूं तब स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है की यह कैसा लोकतंत्र हैं?

कैसे जनता के रक्षक खुद जनता के भक्षक बन सकते हैं?आखिर कैसे कल तक खुद को जनता का सेवक कहने वाले खुद को शासक समझ लेते हैं?

मानवीयता को दर किनार कर कैसे इतनी आसानी से नैतिकता और मर्यादा की सीमाएं लांघ दी जाती है!

यदि यह सियासी विवाद और आंतरिक कलह नहीं थमते है तो हालात और भी बदतर हो सकते हैं? 

विशेष रिपोर्ट -:

जल्द ही हम आपको बताएंगे कि मामले पर ग्राम प्रधान की क्या प्रतिक्रिया है।तमाम आरोपों पर क्या कहते हैं ग्राम प्रधान?

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