ग्राम रहमा - बेलखेड़ी।
तपती धूप में धरने पर बैठे हुए पसीने से लथपथ किसान एवम अन्य ग्रामीण कहते हैं,की प्रशासन ने यदि पहले ही ठोस कार्यवाही की होती तो अतिक्रमण कारियों के हौसले बुलंद न होते।
बात दरअसल यह है कि बेलखेड़ी मोजा की लगभग20एकड़ चरनोई की भूमि जिस पर अतिक्रमण कारियो ने पूर्व में भी गन्ने की फसल का लाभ लेने की कोशिश की थी एवम तब भी ग्रामीणों ने एकजुट होकर अतिक्रमण कारियो के खिलाफ शिकायत कर शासन प्रशासन का ध्यान चरनोई भूमि की ओर आकृष्ट किया था एवम प्रशासन ने भी सहयोगात्मक रवैया अपनाते हुए कार्यवाही की थी।किंतु शासकीय लचर कार्य प्रणाली का फायदा उठाते हुए अतिक्रमण कारियो ने दोबारा गेंहू और गन्ने की फसल तैयार कर ली!
आज मौके पर ग्राम सचिव एवम पटवारी द्वारा पहुंचकर पंचनामा बनाया गया।
मौखिक तोर पर कहा गया कि एक हफ्ते में कार्यवाही उपरांत गेहूं की फसल की नीलामी होगी और गन्ने को ट्रेक्टर से बख्रकर नष्ट किया जाएगा।
हालाकि शासन चरनोई भूमि को अतिक्रमण कारियो से मुक्त कराने के दावे और बाते तो करता है लेकिन ग्रामीण अब महज दावों और बातों से इत्तेफाक नहीं रखते।
ग्रामीण संदेह जाहिर करते हुए कहते हैं कि आखिर, अधिकारी अतिक्रमण कारियो पर सख्ती क्यों नही बरती जा रही है?
जांच और कार्यवाही में ढील दे कर क्या अतिक्रमण कारियो को अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं?
कुछ समय पूर्व भी कार्यवाही की गई थी, लेकिन अतिक्रमणकर्ताओं से भूमि मुक्त ना हो सकी क्या प्रशासनिक कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी है?
मवेशियों को चराने के लिए हर गांव में चरनोई जमीन रहती है, लेकिन अक्सर उस पर कब्जा हो जाने के कारण ग्रामीण परेशान रहते हैं वजह साफ है कि चरनोई जगह न होने के कारण अवारा मवेशी फसलों को नुकसान पहुंंचा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर देखने में आ रहा है कि कागजों में चरनोई भूमि है, फिर भी गौ वंश भूख से तड़प कर मर रहा है।क्या दबंग बार बार अतिक्रमण कर यह साबित करना चाहते हैं कि वे बाहुबल स्थापित करना चाहते हैं।
आगामी विशेष रिपोर्ट एवम न्यूज अपडेट -: