वैसे तो हर गांव की होली अपने आप में अनूठी है।होलिका दहन के किए महिलाएं हाथों में थाली लेकर समूह में होली के गीत गाते हुए पूजन करने पहुंची।
गांव में महिलाओं और लड़कियों ने पारंपरिक पूजन अर्चन के बाद होली पर मंगल गीत गाकर सुख-समृद्धि की कामना की।
लड़के अपने मित्रों की छोटी छोटी टोलियां बना कर गाजे-बाजे के साथ मस्ती और नृत्य में उत्साहित होकर डूबे हुए थे।
अनेक स्थानों पर युवतियों की टोली ने जमकर कदम थिरकाते हुए डांस किया।युवा वर्ग नगाड़ो की थाप और डीजे के धुन पर थिरकते रहे।वहीं कुछ लोग मोबाइल से विडियो ओर सेल्फी लेकर नाचते हुए भी दिखाई दिए।
आज भी गांव में गुलाल देकर आशीर्वाद लेने की परम्परा कायम है।होली का उत्साह ही कुछ ऐसा है की बुजुर्ग भी ढोलक की थाप पर नाचने को मजबूर हो जाते हैं।फाग के दौरान इस तरह के दृश्य मन मोह लेते हैं।
देवर-भाभी, जीजा-साली के बीच हँसी ठिठोली तो होती ही है,नवयुवकों व युवतियों में परस्पर आकर्षण रखने वाले भी होली के त्यौहार के बहाने एक-दूसरे के करीब आने का अवसर नहीं चूकते हैं, प्रेम के वातावरण में भीगा दिखता है हौली का त्यौहार।
गांव की गलियों में बच्चे, बूढ़े और युवाओं का मिल कर होली खेलना,गलियों और चौपालों का रंगो से सराबोर हो जाना,बच्चों की पिचकारियों से उड़ती रंगों की फुहार अनायास ही अनेकता में एकता का अहसास करा देती है।