ग्राम पंचायत।
जिले की ग्राम पंचायतों में जहां महिला ग्राम प्रधान है स्थिति बेहद चिंतनीय है।ऐसा प्रतीत होता है जैसे सरपंच पति और सरपंच ससुर जैसी उपाधियों ने प्रजा तंत्र की धज्जियां उड़ाने की ठान रखी है।महिला ग्राम प्रधान पारिवारिक दबाव के चलते चुप रहने में ही अपनी भलाई समझती हैं।और पद के मद में सरपंच पति अपनी मनमानी करने पर आमदा दिखते हैं।
हालात यह हैं कि महिला ग्राम प्रधान के स्थान पर उनके पति निर्लज्जता पूर्वक ढिठाई दिखाते हुए मीडिया में इंटरव्यू देते हुए दिखाई देते हैं।
इसके पूर्व भी अनेक ग्राम पंचायतों से इस तरह की शिकायत उठती रही है।
आदिवासी या अशिक्षित महिला ग्राम प्रधान होने पर गांव की दुर्दशा की तस्वीरें सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या आज भी महिलाओं को समान अधिकार की बातें सिर्फ कागजी बातें मात्र हैं!
ग्राम पंचायतों के निरीक्षण के दौरान यह बातें सामने आईं हैं की सरपंच पति ही ग्राम पंचायत का काम कर रहे हैं जबकि महिला ग्राम प्रधान यदा कदा ही पंचायत में उपस्थित होते हैं।
आखिर क्या है सरपंच पतियों के मोह का रहस्य !
जानेंगे stringer24news पर।