जिले के शहरी एवम ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चो के स्वास्थ्य एवम विकास हेतु तमाम योजनाएं चल रही हैं।किंतु इनका क्रियान्वयन सफल एवम सुचारू रूप से किया जा रहा है या नही यह जानने की सुध किसी ने नही ली।सूत्रों की माने तो जितना बच्चों के भोलेपन के साथ छल किया जा सकता था विभागों ने उससे भी कहीं अधिक भ्रष्टाचार किया।कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों और मध्याह्न भोजन बनाने वाले स्व सहायता समूहों ने तो पुराना डाटा गुम कर देने का चलन बना लिया है।अधिकांश केंद्रों में बच्चों की संख्या भी वास्तविक नहीं दर्शाई जाती।वही मध्याह्न भोजन के नाम पर भी कम छलावे नही किए गए।कभी मीनू के अनुरूप नहीं तो कभी केवल खिचड़ी या दलिया देकर अपने कर्तव्यों से इति श्री कर ली।कभी बच्चों से बर्तन मंजवा लिए जाते हैं तो कभी थाली में ही पानी पीना पड़ता है।
शिक्षक द्वारा बाहर से ट्रे में बच्चों से चाय बुलवाना भी कोई खास गलत बात नही है।
कथित तौर पर जांच अधिकारी पहुंचते तो है किंतु कोई ठोस कार्यवाही करते हों यह संशय की स्थिति को जन्म देता है।अक्सर लेन देन के चलते शिकायतें दबा देने में ही भलाई समझी जाती है।