नरसिंहपुर।
भ्रष्टाचार,अपराध, जुआ, सट्टा,मादक पदार्थ सब कुछ यहां जस का तस है।कल जो छोटे स्तर पर कारोबार करते थे आज तस्कर,माफिया कहलाने लगे।
हफ्ते * लिफाफे तय कर दिए गए।शिकायतों पर जांच के दायरे तय कर दिए गए।विकास के खेल में करोड़ों के वाहरे न्यारे कर दिए गए।लेकिन सवाल उठाने पर अघोषित पाबंदी लगा दी गई।खरीद फरोख्त के दलदल से होकर गुजरना आवश्यक हो गया।
एक पल को ऐसा लगा कि भ्रष्टाचार ने लोक तंत्र पर ग्रहण लगा रखा है। तंत्र की लचर कार्यशैली ने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि या तो खुद भ्रष्टाचार का हिस्सा बन जाओ या दर्शक बन जाओ और ये दोनो स्थितियां यहां आसान है किंतु भ्रष्टाचार पर प्रहार करना अपराध है क्यों की ऐसा करने से तंत्र की नींद खुलने का खतरा रहता है।
स्थानीय निवासियों की शिकायतों की फाइलों के ढेर यह दर्शाने के लिए पर्याप्त है कि आम जनता के हितों पर गौर करने के लिए योजनाओं और फंड का प्रचार तो प्रसार तो किया जाता है किंतु आज भी स्थिति में कोई सुधार नहीं है।
वहीं विकास की ओर इस शहर में काफी उन्नति भी हुई है। शिक्षा, परिवहन, खेती, जीवन शैली, हर चीज में समय के साथ काफी बदलाव आए हैं।जिले में अब लोग खेती तक ही सीमित नहीं है,बल्कि वे देश दुनिया में व्याप्त तमाम रोज़गार के अवसर के प्रति सजग है।