आखिर 15साल मे ये कुआ पटबारी और शासन प्रशासन को क्यो नही दिखा जिसे तहसीलदार महोदय ने एक ही दौरा पर देख लिया तो क्या यह तय मान लिया जाये कि इसमे आधिकारीयो का पूरा सहयोग रहा कब्जाधारियो के लिए ?
यह ऐसे सवाल हैं जो ग्राम पलेरा की जनता द्वारा उठाए गए हैं हालाकि यह उम्मीद बहुत कम है की प्रशासन ग्रामीणों द्वारा उठाए जा रहे इस तरह के सवालों में दिलचस्पी दिखाए।संभव है की प्रशासन तो इन्हे सवाल ही न माने बल्कि एक सिरे से खारिज करके तमाम सवालों को आरोप और अफवाह बतला दे किंतु तंत्र को यह जान लेना चाहिए कि अब जनता जाग गई है न सिर्फ अपने अधिकारों के प्रति बल्कि अपने गांव के विकास के प्रति भी।
ग्राम पलेरा के निवासी विगत दो माह से भी अधिक समय से शासन प्रशासन के समक्ष चरनोई भूमि पर अतिक्रमण के मामले पर शिकायत कर चरनोई की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाने में लगे हुए थे।इसी क्रम में जब तहसीलदार मौके पर पहुंचे और पंचनामा बनाया गया तब अनेक आश्चर्यजनक और संदेह जनक तथ्य भी सामने आए।हालाकी अधिकारियों ने ग्रामीणों को उचित कार्यवाही करने का आश्वासन अवश्य दिया है।
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