ग्राम पंचायत नादिया।
जीआरएस राजपूत द्वारा विशेष वार्ता के दौरान नरेगा कार्यों में धांधली के आरोपों को सिरे से नकारा गया।वहीं प्रधान मंत्री आवास निर्माण योजना में गड़बड़ी को लेकर अपनी सफाई में कहा कि महज ग्यारह शिकायत कर्ता है जिनके द्वारा बारबार शिकायत की जाती है जबकि उसमें से कुछ अपात्र हैं और कुछ व्यक्तियों के कार्य प्रस्तावित हैं। ग्राम पंचायत द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती गई है।
वहीं दूसरी ओर जब हमारी टीम द्वारा गांव का जायजा लिया गया और स्थानीय निवासियों से चर्चा की गई तब आश्चर्यजनक तथ्य सामने आए।
गांव की सड़कें टूटी फूटी हैं,प्रथम दृष्टया ही प्रतीत होता है की बरसों से मरम्मत का कार्य भी नही कराया गया है।वहीं नालियों के नाम पर कहीं सड़क खोदकर काम चलाया गया है तो कहीं काम प्रारंभ ही नहीं किया गया।यह सौभाग्य की बात है की मुख्य मार्ग पर अवश्य नाली दिखाई देती है।ग्रामीण दूषित जल निकासी को लेकर व्यथित दिखाई दिए।पेयजल स्त्रोत गंदगी से घिरे हुए होने से महिलाओं और बच्चों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।मुक्तिधाम को लेकर की गई अनियमितताओं और लापरवाही ने ग्रामीणों की स्थिति को और दुष्कर बना दिया है।खेल मैदान के नाम पर भी महज खानापूर्ति की चर्चाएं सामने आई।
नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने चर्चा के दौरान बताया कि मुक्तिधाम और खेल मैदान की दशा अत्यंत ही खराब है।वहीं दबी जुबान में गांव की महिलाओं ने कहा कि जीआरएस और ग्राम प्रधान महज अपने चहेतों को सुविधाएं पहुंचाने में व्यस्त हैं।सड़क और नाली की स्थिति गांव में इतनी खराब क्यों है पूछने पर कुछ महिलाओं ने व्यंगात्मक लहजे में कहा कि ग्राम प्रधान और जीआरएस गांव के विकास से अधिक खुद के विकास को लेकर चिंतित रहते हैं तो उन्हें गांव की बदतर स्थिति की चिंता क्यों होगी? गांव के विकास को जीआरएस और ग्राम प्रधान द्वारा अपने निजी स्वार्थों के हितों की पूर्ति हेतु बाधित किया जा रहा है।
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