नरसिंहपुर।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आधुनिक दौर में मीडिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
अमूमन हर काल खंड में कोई भी देश और समाज अभिव्यक्ति के साधन स्वतंत्र होने पर ही अमन और चैन की कल्पना कर सकता है।
किंतु आज परिस्थितियां विपरित दिखाई देती हैं।आजकल मिडिया का एक बड़ा वर्ग महज विज्ञप्ति और गुणगान में तल्लीन नजर आता हैं।
इसे नियति का दुर्भाग्य ही कहेंगे की आज सच्चाई कोई बयान नहीं कर रहा है।वही लिखा जाता है और उतना ही लिखा जाता है जिससे की आकाओं को खुश रखा जा सके। सच का एक पहलू यह भी है की जिले में अनेक ऐसे लोग जो खुद को पत्रकार कहलाते हैं आंतरिक तौर पर वे मुनाफे के लिए भ्रष्टाचारीयो के हाथों की कठपुतली और चंद रानजीतिक दलों के पार्टी प्रवक्ता बनकर रह गए हैं।
स्थिति यह है की आज भ्रष्टाचारियों की दहलीज से विज्ञापन की आस में मीडिया ही मीडिया पर प्रहार करने लगा है।
सफलता का नशा मीडिया के सर चढ़ने से अभिव्यक्ति की आजादी के दुरुपयोग का संदेह भी बड़ जाता है।आज आम जनता में मिडिया की विश्वसनीयता कम होने का कारण यह भी है।पत्रकारिता का धर्म आज पेशे के नजरिए से देखा जाने लगा है।सेटेलाइट स्पेस, मंहगे इक्विपमेंट और सैलरी पर किए जाने वाले भारी खर्च के चलते मीडिया का व्यवसायीकरण होना आश्चर्य की बात नहीं है।
मर्यादाओं की सीमाएं लांघ दी गई हैं।अभद्रता और अशिष्टता का एक दौर शुरू हो गया है।ऐसा प्रतीत होता है जैसे मीडिया के बीच आपस में ही घमासान जारी है और एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए किसी भी हद से गुजरने से परहेज नहीं किया जा रहा है।एक-दूसरे से बेहतर दिखाना और अपने हाथोंं अपनी पीठ थपथपाने में शर्म का कोई कारण नहीं है। हर कोई अपने आप को श्रेष्ठ और संयमित बताकर दूसरों के सर पर मर्यादाओं के उल्लंघन का दोष मढ़नाा सहज हो गया हैं।कुछ मिडिया कर्मी आज खुद को उच्च, विशिष्ट और न्याय कर्ता माननेे वाली संकीर्ण मानसिकता से ग्रस्त हो गए हैं।
आम जनता की आज मीडिया से आदर्शवादी रहने की अपेक्षा कम हो गई है।
आज जब भ्रष्टाचार ने हर विभाग को चपेट में ले रखा है तब भला मीडिया अछूता कैसे रह सकता है।
बावजूद इस सबके आज भी ऐसे पत्रकार मौजूद हैं जो जीवन को खतरे में डालकर समाज को एक नई दिशा देने के लिए प्रयासरत हैं।