नरसिंहपुर लुट रहा था और सब तमाशा देख रहे थे!
इतिहास याद रखेगा इन पलों को अपने काले पन्नों में समेटकर जब ग्राम पंचायतों में विकास के लिए आया सरकारी खजाना लूटा जा रहा था लेकिन लोग चुप थे!
चुप थे क्योंकि वे डरे हुए सहमे हुए थे?कहीं उनको मिलने वाली सुविधाएं बंद न हो जाएं!कहीं वो विरोधियों की नजर में चढ़ जाएं और अफसरशाही इसलिए खामोश थी क्योंकि ऊपर से दबाव था!दबाव था चुप रहो क्योंकि यहां बोलने पर भी सुनने वाला कोई नहीं है!
इतिहास याद रखेगा इन लम्हों को जब गरीब विकास की राह तक रहा था और पूंजीवादी धनाढ्य होते जा रहे थे!नहीं भूलेगा इतिहास यह कभी की, किस तरह सेवा के नाम पर मेवा और मलाई को हजम किया जा रहा था!
यह शहर इतना खामोश इसलिए नहीं है कि सब ठीक है!यह शहर इतना खामोश इसलिए है क्योंकि कोई जिम्मेदारी नहीं उठाना चाहता विरोध की!नागरिक बोध मर गया है फिर भी लोकतंत्र जिंदा है,इतिहास यह भी याद रखेगा!
सब हां में हां मिलाए जा रहे थे,बड़े बड़े होर्डिंग फ्लेक्स लग रहे थे,उत्सव चल रहे थे,लेकिन फिर भी हवा में एक अजीब बेचैनी थी,खामोशी थी, सन्नाटा था क्यों?इतिहास याद रखेगा और पीढियां पूछेगी!
इतिहास गवाह रहेगा कि, मीडिया कैसे काम कर रहा था!किस तरह मुद्दे खरीदे बेचे जा रहे थे!किस तरह जनता को सूचनाओं के नाम पर सिर्फ आधी अधूरी जानकारियां साझा की जा रही थी!नहीं भूलेगा इतिहास इन काले पन्नों को,लिखा जाएगा सब काली स्याही से!
इतिहास लिखेगा हम जैसे कुछ लोग मर गए गुमनामी में लिखते हुए!इतिहास लिखेगा कुछ लोगों ने कलम बेचकर खरीदी थी सोने की मोहरें!
नहीं उठाई आवाज किसी ने जब नर्मदा खोखली हुई,वो सिमटती रही लेकिन लोग देखते रहे!नहीं उठाई गई आवाज जब युवा रगों में नशा उतर रहा था!नहीं उठाई गई आवाज जब योजनाओं का चीर हरण हो रहा था!
